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आईजीएमसी में एक घंटे कामकाज ठप, गेट पर मौन खड़े रहे कर्मचारी
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कोरोनाकाल में घोषित प्रोत्साहन राशि जारी न करने से आउटसोर्स कर्मचारी खफा
क्रॉसर
अस्पताल में आउटसोर्स पर तैनात हैं पांच सौ कर्र्मी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में कार्यरत आउटसोर्स कर्मियों ने वीरवार को काम छोड़कर अस्पताल के मुख्य गेट पर मौन रहकर अपनी नाराजगी जताई। दरअसल यह कर्मचारी कोरोनाकाल में प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) न देने से खफा हैं। सरकार ने कर्मचारियों को इंसेंटिव देने की घोषणा की थी जो अभी तक नहीं मिला है।
कर्मचारियों ने करीब एक घंटे तक कामकाज ठप रखा और गेट पर मौन खड़े रहे। कर्मचारियों ने दोपहर बाद बारह बजे से एक बजे तक कामकाज बंद रखा। इस कारण अस्पताल आए मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। मरीजों को ईसीजी टेस्ट के लिए इंतजार करना पड़ा। वार्डों में सफाई व्यवस्था भी बंद रही। मरीजों को एक वार्ड से दूसरे में ले जाने में भी दिक्कतें आई हैं। आईजीएमसी में आउटसोर्स पर करीब पांच सौ कर्मचारी तैनात हैं।
विरोध जताने के बाद आईजीएमसी आउटसोर्स कर्मचारी यूनियन के प्रधान वीरेंद्र लाल ने बताया कि कोरोनाकाल के दौरान इन कर्मचारियों ने अपनी जान की परवाह किए बगैर अस्पतालों में सेवाएं दी हैं। कुछ माह पहले सरकार ने कोरोना में ड्यूटी देने वाले कर्मचारियों को इन्सेंटिव देने की बात कही गई थी लेकिन इंसेटिव अभी तक नहीं मिला।
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वीरवार दोपहर बारह बजे सैकड़ों की तादाद में सीटू के बैनर तले ईसीजी, सफाई कर्मी और वार्ड अटैंडेंट काली पट्टी बांधकर अस्पताल के गेट पर खड़े हो गए। इसके अलावा कर्मचारी पंद्रह हजार रुपये मासिक वेतन करने की मांग भी कर रहे हैं।
प्राचार्य ने दिया समाधान का आश्वासन
दोपहर एक बजे यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने कॉलेज प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र सिंह से मुलाकात की। वीरेंद्र लाल ने बताया कि प्राचार्य ने आश्वासन दिया है कि वह इस बारे में जल्द बैठक करेंगे। प्रदर्शन में राज्य सचिव रमाकांत मिश्रा, जिला सचिव बाबू राम, बालक राम, हिमी देवी, यूनियन अध्यक्ष वीरेंद्र लाल, महासचिव नोख राम, उपाध्यक्ष सीता राम, सुरेंद्रा, पमीश कुमार, सीमा देवी, सरीना, जगत राम, लेखराज, विद्या गाजटा, शालू कुमारी, गीता, वंदना, धीरज, इंदु, विद्या, हेमावती, देवा, पुनमा, मीरा मौजूद रही।
अस्पताल प्रबंधन का रवैया नकारात्मक : मेहरा
सीटू के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन का रवैया आउटसोर्स कर्मचारियों के खिलाफ है। कर्मियों को न तो न्यूनतम वेतन दिया जा रहा है और न ही छुट्टियां मिल रही हैं। मेडिकल, ईएसआई और पे स्लिप न देने से प्रशासन के नकारात्मक रवैये को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया कि अगर कर्मी मांगों को लेकर अपनी बात ठेकेदारों के पास रखते है तो उन्हें डराया धमकाया जाता है। मजदूरों के समझौते को लागू किया जाए अगर ऐसा नहीं होता है तो आने वाले दिनों में आंदोलन किया जाएगा।
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क्रॉसर
अस्पताल में आउटसोर्स पर तैनात हैं पांच सौ कर्र्मी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में कार्यरत आउटसोर्स कर्मियों ने वीरवार को काम छोड़कर अस्पताल के मुख्य गेट पर मौन रहकर अपनी नाराजगी जताई। दरअसल यह कर्मचारी कोरोनाकाल में प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) न देने से खफा हैं। सरकार ने कर्मचारियों को इंसेंटिव देने की घोषणा की थी जो अभी तक नहीं मिला है।
कर्मचारियों ने करीब एक घंटे तक कामकाज ठप रखा और गेट पर मौन खड़े रहे। कर्मचारियों ने दोपहर बाद बारह बजे से एक बजे तक कामकाज बंद रखा। इस कारण अस्पताल आए मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। मरीजों को ईसीजी टेस्ट के लिए इंतजार करना पड़ा। वार्डों में सफाई व्यवस्था भी बंद रही। मरीजों को एक वार्ड से दूसरे में ले जाने में भी दिक्कतें आई हैं। आईजीएमसी में आउटसोर्स पर करीब पांच सौ कर्मचारी तैनात हैं।
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विरोध जताने के बाद आईजीएमसी आउटसोर्स कर्मचारी यूनियन के प्रधान वीरेंद्र लाल ने बताया कि कोरोनाकाल के दौरान इन कर्मचारियों ने अपनी जान की परवाह किए बगैर अस्पतालों में सेवाएं दी हैं। कुछ माह पहले सरकार ने कोरोना में ड्यूटी देने वाले कर्मचारियों को इन्सेंटिव देने की बात कही गई थी लेकिन इंसेटिव अभी तक नहीं मिला।
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वीरवार दोपहर बारह बजे सैकड़ों की तादाद में सीटू के बैनर तले ईसीजी, सफाई कर्मी और वार्ड अटैंडेंट काली पट्टी बांधकर अस्पताल के गेट पर खड़े हो गए। इसके अलावा कर्मचारी पंद्रह हजार रुपये मासिक वेतन करने की मांग भी कर रहे हैं।
प्राचार्य ने दिया समाधान का आश्वासन
दोपहर एक बजे यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने कॉलेज प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र सिंह से मुलाकात की। वीरेंद्र लाल ने बताया कि प्राचार्य ने आश्वासन दिया है कि वह इस बारे में जल्द बैठक करेंगे। प्रदर्शन में राज्य सचिव रमाकांत मिश्रा, जिला सचिव बाबू राम, बालक राम, हिमी देवी, यूनियन अध्यक्ष वीरेंद्र लाल, महासचिव नोख राम, उपाध्यक्ष सीता राम, सुरेंद्रा, पमीश कुमार, सीमा देवी, सरीना, जगत राम, लेखराज, विद्या गाजटा, शालू कुमारी, गीता, वंदना, धीरज, इंदु, विद्या, हेमावती, देवा, पुनमा, मीरा मौजूद रही।
अस्पताल प्रबंधन का रवैया नकारात्मक : मेहरा
सीटू के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन का रवैया आउटसोर्स कर्मचारियों के खिलाफ है। कर्मियों को न तो न्यूनतम वेतन दिया जा रहा है और न ही छुट्टियां मिल रही हैं। मेडिकल, ईएसआई और पे स्लिप न देने से प्रशासन के नकारात्मक रवैये को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया कि अगर कर्मी मांगों को लेकर अपनी बात ठेकेदारों के पास रखते है तो उन्हें डराया धमकाया जाता है। मजदूरों के समझौते को लागू किया जाए अगर ऐसा नहीं होता है तो आने वाले दिनों में आंदोलन किया जाएगा।