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Shimla: कुत्तों ने बच्चे को किया लहूलुहान, मेयर दफ्तर के बाहर धरना, सदन में महापौर और कांग्रेस पार्षद में बहस

Wed, 30 Apr 2025 08:26 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 30 Apr 2025 08:26 PM IST
सार

शिमला में लावारिस कुत्तों ने तीन स्कूली बच्चों पर हमला किया। हमले में दो छात्र लहूलुहान हुए हैं। 

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Stray dogs attacked three school children, two were left bleeding
लावारिस कुत्तों ने तीन स्कूली बच्चों को काटा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी में बुधवार को स्कूली बच्चे पर हुए लावारिस कुत्तों के हमले पर खूब बवाल हुआ। कुत्ते के हमले में लहूलुहान हुए बेटे को पहले पिता ने आईजीएमसी अस्पताल पहुंचाकर भर्ती करवाया। फिर खुद दोपहर 12:00 बजे महापौर दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गए।

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वहीं दोपहर 3:00 बजे से शुरू हुए नगर निगम सदन में भी पार्षदों ने इस मामले पर हंगामा कर दिया। सदन शुरू होते ही कांग्रेस और भाजपा के कई पार्षद अपनी सीट पर खड़े हो गए और इस पर जवाब मांगने लगे। पार्षद कमलेश मेहता, निशा ठाकुर, विशाखा मोदी, आशा शर्मा, सिमी नंदा और वीरेंद्र ठाकुर ने पूछा कि कुत्तों के आतंक से कब राहत मिलेगी। नगर निगम इतना लापरवाह है कि कुत्तों को भी नहीं पकड़ रहा। आखिर इनकी नसबंदी के लिए डॉक्टर कब आएगा। मेयर सुरेंद्र चौहान और आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने कहा कि नियमों के अनुसार ही हम कार्रवाई कर सकते हैं।
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डॉक्टर की तैनाती का मामला सरकार के सामने उठाया है। कहा कि जब तक डॉक्टर नहीं मिल जाते तब तक किसी आउटसोर्स एजेंसी से यह काम करवा सकते हैं। पार्षदों को डॉग रूल बताए गए। इस पर पार्षद भड़क गए। कांग्रेस पार्षद नरेंद्र ठाकुर बोले कि जिस गरीब के बच्चे को काटा है, क्या उसे हम यह रूल दिखाएंगे। बोले कि हमें शर्म आती है कि हम कुछ नहीं कर पा रहे। गुस्साए लोग पार्षदों को जूते मारने के लिए तैयार हैं। पार्षद अनिता शर्मा ने कहा कि लंगूर पकड़ने में भी यही जवाब मिलता है।

कांग्रेस पार्षद नरेंद्र ठाकुर और मेयर के बीच तीखी बहस भी हो गई। मेयर ने कहा कि राजनीति मत कीजिए और यदि सुझाव हैं तो बताएं। इसके बाद पार्षद नरेंद्र ठाकुर भाजपा पार्षदों के साथ मेयर के सामने धरने पर बैठ गए। हंगामा बढ़ता देख मेयर को 3:40 बजे सदन स्थगित करना पड़ा। 20 मिनट बाद 4:00 बजे जब दोबारा सदन शुरू हुआ तो फिर इस पर हंगामा हुआ। पार्षद बोले कि इस बारे में कोर्ट में याचिका दायर की जाए। आयुक्त ने कहा कि इस मामले पर कोर्ट में मामला भी चल रहा है। निगम ने पहले ही इस मामले में अपना पक्ष रखा है। हाईकोर्ट ने भी इस मामले में केंद्र को नोटिस दिया है जिसमें डॉग रूल में संशोधन करने को कहा है।

राहत नहीं दे सकते, मुआवजा देने का दावा
सदन ने पारित किया कि कुत्तों के हमले में लहूलुहान हो रहे लोगों को राहत के तौर पर मुआवजा देने की मांग सरकार से उठाई जाएगी। पकड़े जाने वाले हमलावर कुत्तों को दो की बजाय दस दिन बाद छोड़ा जाएगा। कुत्तों को पकड़ने के लिए आठ कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

ढली टनल के पास 8 कुत्तों ने बच्चे पर किया हमला
शहर के लोअर बाजार के कारोबारी एवं ढली निवासी कर्मचंद भाटिया बुधवार सुबह अपने आठ साल के बेटे आदित्य को लेकर स्कूल के लिए निकले थे। आदित्य केंद्रीय विद्यालय जाखू में दूसरी कक्षा का छात्र है।
 
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ढली टनल के पास पहुंचा आदित्य अपने दोस्तों के साथ खेलते-खेलते पिता से चंद मीटर आगे निकल गया। इसी बीच यहां सड़क किनारे आठ कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। बाकी बच्चे तो भाग गए लेकिन आदित्य की टांग को कुत्ते नोचने लगे। इसकी चीख पुकार सुनकर यहां सफाई का काम कर रहे कर्मचारी मौके की ओर दौड़े ओर किसी तरह इसे कुत्तों से छुड़ाया। पिता कर्मचंद भाटिया लहुलूहान हुए बेटे को लेकर आईजीएमसी अस्पताल पहुंचे। यहां प्राथमिक उपचार देकर इसे भर्ती करवाया। इसके बाद महापौर दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गए। कहा कि नगर निगम हमलावर हो चुके कुत्तों को भी नहीं पकड़ रहा। आए दिन कुत्ते लोगों पर हमले कर रहे हैं। तीन घंटे तक मेयर दफ्तर के बाहर धरने पर डटे रहे। मेयर सुरेंद्र चौहान ने भरोसा दिया कि कुत्तों से आतंक से राहत दिलाने के लिए योजना बनाएंगे। इसके बाद कर्मचंद भाटिया ने धरना खत्म किया।

कुत्तों का आतंक, चार लोगों को काटा
शहर में बुधवार को कुत्तों के काटने के चार मामले सामने आए। ढली में लावारिस कुत्तों ने बच्चे समेत दो लोगों को काटा। नगर निगम ने शिकायत के बाद मौके से एक कुत्ते को पकड़ लिया जबकि बाकी भाग गए। इसके अलावा कृष्णानगर और जाखू में भी कुत्तों ने दो लोगों को काटा है। शहर में हर माह कुत्तों के काटने के 150 से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। उधर निगम के पास नसबंदी के लिए डॉक्टर तक नहीं है। पार्षदों का कहना है कि डॉक्टर का तबादला होने पर उन्हें तब तक रिलीव नहीं करना चाहिए था जब तक सरकार नया डॉक्टर न भेज देती लेकिन निगम ने ऐसा नहीं किया।
 
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