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दिव्यांग का दंश झेल रही अनीतू की दर्दभरी दास्तां पढ़कर रो देंगे आप

Mon, 05 Dec 2016 11:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 05 Dec 2016 11:35 AM IST
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Story of divyang anitu

चार बाई चार फीट का ढारा। हर ओर बदबू। इसी ढारे में सोना, खाना और पीना। जिले के ननखड़ी उपतहसील के कुंगल बाल्टी गांव की दिव्यांग अनीतू का जीवन नारकीय परिस्थितियों में गुजर रहा है। चलने-फिरने में असमर्थ है, ऐसे में शौच भी इसी ढारे में कर देती है। इसका पालन- पोषण कर रहे नाना-नानी जिंदगी के आखिरी पड़ाव में हैं। 

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दोनों के लिए खुद को संभालना ही मुश्किल हो गया है। 25 साल की अनीतू पिछले तीन साल से इसी ढारे में पड़ी है। मां ने इसे नाना- नानी के हवाले कर शादी कर ली। कभी-कभार इससे मिलने आती है। नाना राम सिंह और नानी केम्पू देवी ने बताया कि 22 साल तक उन्होंने अनीतू का पालन-पोषण किया। अब दोनों का बूढ़ा शरीर जवाब देने लग गया है। उन्होंने हार मान ली है और तीन साल पहले एक ढारा बनाकर अनीतू को उसी में रख दिया है। वह शौच आदि वहीं करती है।

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पहाड़ी बोली समझती तो है पर बोलने में असमर्थ

Story of divyang anitu
उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव

अनीतू का नाम पंचायत के परिवार रजिस्टर में भी दर्ज नहीं है। उसके पिता के बारे में किसी को कुछ नहीं मालूम। गांव के लोग कहते हैं कि उसे पोलियो है। गरीबी अज्ञानता और दुर्गम क्षेत्र होने के कारण उसे आज तक किसी डॉक्टर को नहीं दिखाया गया। वह पहाड़ी बोली समझती तो है पर बोलने में असमर्थ है। आंखों में विकृति है और मुंह से हर समय लार बहती रहती है। 

केम्पू देवी बताती हैं कि अनीतू को खाने में चपाती पसंद है वो चावल नहीं खाती। वह अपनी मां को भी याद करती है, जो कभी कभी उससे मिलने आती है। राम सिंह ने कहा कि वे अब उसे संभाल नहीं सकते। केम्पू देवी और राम सिंह चाहते हैं कि अनीतू को किसी आश्रम में रख दिया जाए। उन्हें चिंता है कि उनकी मौत के बाद उसका क्या होगा।

शिमला की उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने बताया कि फाउंडेशन के सदस्य उनके साथ ननखड़ी पहुंचे। लड़की को चार फुट के ढारे में रखा गया है। घसीट-घसीट कर चलना उसकी नियति बन गया है। यह नाना और नानी के पास रहती है। वे दोनों भी बूढ़े हो गए हैं।

इस दौरान एडवोकेट बलवंत ठाकुर, उमंग फाउंडेशन की ट्रस्टी विमला ठाकुर, दीपिका शर्मा और अमित शर्मा भी मौजूद थे। श्रीवास्तव ने बताया कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की सचिव को पत्र लिखकर अनीतू की व्यथा बताई है और मांग की है कि 15 दिसंबर तक लड़की को गांव से लाकर उसकी डांक्टरी जांच कराई जाए और किसी नारी सेवा सदन में रखा जाए।

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