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Shimla News: नसबंदी से घटी कुत्तों की तादाद, हर 11वां कुत्ता आक्रामक

Sun, 11 Oct 2026 11:35 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 11 Oct 2026 11:35 PM IST
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Sterilization reduces dog population; every 11th dog is aggressive.
माल रोड पर कुत्ते ।
अमर उजाला एक्सक्लूसिव....
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नगर निगम के सर्वेक्षण में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
बीते साल शहर में मिले थे 3507 लावारिस कुत्ते, इस साल 3070 का आंकड़ा, शहर से सटे इलाकों में भी एक हजार कुत्ते
अशोक चौहान
शिमला। राजधानी में लावारिस कुत्तों को लेकर नगर निगम की ओर से करवाए सर्वेक्षण में शहर के 34 वार्डों में 3070 कुत्ते मिले हैं। बीते वर्ष यह संख्या 3507 थी। नसबंदी के कारण कुल संख्या में कमी दर्ज की गई है, लेकिन कई वार्डों में कुत्तों की संख्या बढ़ी है। भट्ठाकुफर, टुटू-मज्याठ, कृष्णानगर और कच्चीघाटी समेत कई वार्डों में इनकी संख्या 125 से अधिक है। वहीं, ढली और विकासनगर जैसे वार्डों में संख्या घटी है।
सर्वेक्षण में पहली बार नर्वस और आक्रामक श्रेणी के कुत्तों का ब्योरा भी जुटाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, शहर में 280 से अधिक कुत्ते इस श्रेणी में मिले हैं। यानी कुल संख्या का करीब 9.2 प्रतिशत हिस्सा नर्वस या आक्रामक व्यवहार वाला है। इन कुत्तों को पकड़कर टीका लगाने के लिए टीमों को जाल का सहारा लेना पड़ा।
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शहर में कुत्तों के बढ़ते हमलों को देखते हुए नगर निगम ने दो अक्तूबर से एक संस्था के साथ मिलकर अभियान शुरू किया था। इसके तहत कुत्तों को एंटी रेबीज टीके लगाने के साथ उनकी गणना और व्यवहार का सर्वेक्षण भी किया गया। रिपोर्ट में वार्डवार आंकड़े दर्ज किए गए हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, 90 प्रतिशत से अधिक कुत्तों को टीमों ने बिना जाल के हाथ से पकड़कर टीका लगाया।
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नर्वस और आक्रामक कुत्तों पर नजर जरूरी
सर्वेक्षण में नर्वस श्रेणी में ऐसे कुत्तों को रखा गया है जो लोगों से डरते हैं। डर या खुद को बचाने की कोशिश में कुछ कुत्ते काट सकते हैं, हालांकि सभी नर्वस कुत्ते आक्रामक नहीं होते। वहीं, आक्रामक श्रेणी में ऐसे कुत्तों को रखा गया है जिनमें लोगों पर काटने या हमला करने की प्रवृत्ति देखी गई। इन कुत्तों को पकड़ने और टीकाकरण करने में टीमों को अधिक मशक्कत करनी पड़ी।
शहर से सटे क्षेत्रों में भी मिले एक हजार कुत्ते
शिमला से सटे पंचायती क्षेत्रों घणाहट्टी, शोघी, नालदेहरा, कुफरी और सोलन के कुछ इलाकों में भी टीमों ने कुत्तों की गणना और टीकाकरण किया। इन क्षेत्रों में एक हजार लावारिस कुत्ते मिले। इस तरह शहर और आसपास के क्षेत्रों में 4070 कुत्तों का टीकाकरण किया गया।
महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि शिमला शहर में लावारिस कुत्तों की नसबंदी का अभियान शुरू किया जाएगा। बार-बार लोगों को काटने वाले कुत्तों को भी नगर निगम पकड़ रहा है। नसबंदी के कारण शहर में कुत्तों की संख्या कम हो रही है और आने वाले वर्षों में इसमें और कमी आने की उम्मीद है।
इन वार्डों में सबसे ज्यादा कुत्ते
वार्ड
लावारिस कुत्ते
टुटू-मज्याठ
287

कृष्णानगर

162

भट्ठाकुफर

149

कच्चीघाटी

125

संजौली

108

हर महीने करीब 150 लोगों को काट रहे कुत्ते
शहर के आईजीएमसी और डीडीयू अस्पतालों में हर महीने औसतन 150 लोग कुत्तों के काटने के बाद उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें कई मामले गंभीर भी होते हैं। हाल ही में 21 सितंबर को शांकली में दो साल की बच्ची को कुत्ते घर के गेट से उठाकर ले गए थे। लोगों ने करीब 20 मीटर दूर सड़क पर बच्ची को कुत्तों से बचाया था।

स्थानीय स्तर पर स्कूली बच्चों के कुत्तों के काटने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। दावा है कि हर महीने पांच से अधिक स्कूली बच्चे इनका शिकार हो रहे हैं। दूसरी ओर, कुत्तों के काटने पर मुआवजा नहीं मिलने और नगर निगम में नसबंदी के लिए डॉक्टर की कमी का मुद्दा भी उठ रहा है।
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