मंडी के पधर में होगा राज्यस्तरीय हिमाचल दिवस समारोह, ऐसे अस्तित्व में आया था प्रदेश
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर 15 अप्रैल को मंडी जिले के पधर में राज्यस्तरीय हिमाचल दिवस समारोह की अध्यक्षता करेंगे। उनके साथ जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर भी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम कोविड प्रोटोकॉल की अनुपालना करते हुए होंगे। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष विपिन सिंह परमार जिला कांगड़ा स्थित धर्मशाला में कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज शिमला में जिलास्तरीय समारोह की अध्यक्षता करेंगे। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री सरवीण चौधरी ऊना, तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा केलांग, पंचायतीराज मंत्री वीरेंद्र कंवर हमीरपुर, उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह सोलन, शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुुर कुल्लू, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. राजीव सैजल किन्नौर स्थित रिकांगपिओ और ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी जिला सिरमौर के नाहन में कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजिंद्र गर्ग बिलासपुर में जिलास्तरीय हिमाचल दिवस समारोह की अध्यक्षता करेंगे। वन मंत्री राकेश पठानिया चंबा में जिलास्तरीय हिमाचल दिवस समारोह की अध्यक्षता करेंगे। उनके साथ विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज उपस्थित रहेंगे।
हिमाचल इतिहास के झरोखे से
जनवरी 1948 में शिमला हिल्स स्टेट्स यूनियन सम्मेलन सोलन में हुआ था। हिमाचल प्रदेश के निर्माण की घोषणा इस सम्मेलन में की गई थी। दूसरी तरफ प्रजामंडल के नेताओं का शिमला में सम्मेलन हुआ, जिसमें यशवंत सिंह परमार ने इस बात पर जोर दिया कि हिमाचल प्रदेश का निर्माण तभी संभव है, जब सत्ता प्रदेश की जनता तथा राज्य के हाथ सौंप दी जाए। दो मार्च, 1948 को शिमला हिल स्टेट के रियासती शासकों का सम्मेलन दिल्ली में हुआ। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में शामिल होने के लिए 8 मार्च 1948 को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। 15 अप्रैल 1948 को हिमाचल प्रदेश का निर्माण किया गया। 27,018 वर्ग किलोमीटर में फैली लगभग 30 रियासतों को मिलाकर इस केंद्र शासित प्रदेश को बनाया गया। उस समय हिमाचल प्रदेश में चार जिला महासू, सिरमौर, चंबा और मंडी बने। तब प्रदेश की जनसंख्या करीब 9 लाख 35 हजार थी।