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Shimla News: संगीत अध्यापकों की भर्ती के पात्रता नियमों में बदलाव करे प्रदेश सरकार
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शिक्षा मंत्री से संगीत अभ्यर्थियों ने किया आग्रह
बोले, बीएड की अनिवार्यता से कई अभ्यर्थी हो रहे भर्ती से बाहर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। संगीत विषय में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे और कर चुके अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने वीरवार को शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने स्कूलों में संगीत शिक्षकों की भर्ती के पात्रता नियमों में बदलाव की मांग उठाई।
अभ्यर्थियों ने कहा कि प्रदेश में संगीत विद्यार्थियों के लिए अन्य राज्यों की तर्ज पर संगीत विषय में अलग बीएड और टीईटी की व्यवस्था नहीं है। इसके बावजूद म्यूजिक टीचर के पदों के लिए बीएड अनिवार्य होने से बड़ी संख्या में संगीत में स्नातक और स्नातकोत्तर अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं।प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि संगीत विषय में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद सामान्य बीएड करने में भी विषय संयोजन की समस्या सामने आती है। कई अभ्यर्थी ऐसा विषय संयोजन नहीं बना पाते जिससे वह म्यूजिक टीचर पद के लिए निर्धारित पात्रता पूरी कर सकें। इससे संगीत शिक्षकों के उपलब्ध पदों के लिए पात्र अभ्यर्थियों की संख्या भी प्रभावित हो रही है।
अभ्यर्थियों ने कहा कि संगीत एक विशिष्ट और व्यावहारिक विषय है। इसमें गायन, वादन, राग, ताल, संगीत सिद्धांत और प्रस्तुति जैसी विशेष दक्षताओं की जरूरत होती है। ऐसे में संगीत शिक्षक की नियुक्ति में संगीत विषय की शैक्षणिक और व्यावहारिक योग्यता को प्राथमिक आधार बनाया जाना चाहिए और संगीत के लिए अलग कैडर बनाया जाना चाहिए। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार शिक्षा मंत्री ने उनकी मांगों को ध्यानपूर्वक सुना और मामले को आगामी कैबिनेट बैठक में चर्चा के लिए रखने का आश्वासन दिया। अभ्यर्थियों ने उम्मीद जताई कि सरकार संगीत में एमए, एमफिल और पीएचडी जैसी उच्च योग्यता रखने वाले युवाओं के लिए स्कूलों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में उचित निर्णय लेगी। प्रतिनिधिमंडल में रुपांश सहित कई अभ्यर्थी शामिल रहे।
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बोले, बीएड की अनिवार्यता से कई अभ्यर्थी हो रहे भर्ती से बाहर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। संगीत विषय में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे और कर चुके अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने वीरवार को शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने स्कूलों में संगीत शिक्षकों की भर्ती के पात्रता नियमों में बदलाव की मांग उठाई।
अभ्यर्थियों ने कहा कि प्रदेश में संगीत विद्यार्थियों के लिए अन्य राज्यों की तर्ज पर संगीत विषय में अलग बीएड और टीईटी की व्यवस्था नहीं है। इसके बावजूद म्यूजिक टीचर के पदों के लिए बीएड अनिवार्य होने से बड़ी संख्या में संगीत में स्नातक और स्नातकोत्तर अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं।प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि संगीत विषय में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद सामान्य बीएड करने में भी विषय संयोजन की समस्या सामने आती है। कई अभ्यर्थी ऐसा विषय संयोजन नहीं बना पाते जिससे वह म्यूजिक टीचर पद के लिए निर्धारित पात्रता पूरी कर सकें। इससे संगीत शिक्षकों के उपलब्ध पदों के लिए पात्र अभ्यर्थियों की संख्या भी प्रभावित हो रही है।
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अभ्यर्थियों ने कहा कि संगीत एक विशिष्ट और व्यावहारिक विषय है। इसमें गायन, वादन, राग, ताल, संगीत सिद्धांत और प्रस्तुति जैसी विशेष दक्षताओं की जरूरत होती है। ऐसे में संगीत शिक्षक की नियुक्ति में संगीत विषय की शैक्षणिक और व्यावहारिक योग्यता को प्राथमिक आधार बनाया जाना चाहिए और संगीत के लिए अलग कैडर बनाया जाना चाहिए। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार शिक्षा मंत्री ने उनकी मांगों को ध्यानपूर्वक सुना और मामले को आगामी कैबिनेट बैठक में चर्चा के लिए रखने का आश्वासन दिया। अभ्यर्थियों ने उम्मीद जताई कि सरकार संगीत में एमए, एमफिल और पीएचडी जैसी उच्च योग्यता रखने वाले युवाओं के लिए स्कूलों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में उचित निर्णय लेगी। प्रतिनिधिमंडल में रुपांश सहित कई अभ्यर्थी शामिल रहे।
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