{"_id":"a75b371b39c0aad3337ab59b3e2f1139","slug":"standard-demo-buses-in-shimla-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब शिमला में इन बसों में आरामदायक सफर का लें मजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब शिमला में इन बसों में आरामदायक सफर का लें मजा
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Tue, 02 Dec 2014 01:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जेएनएनयूआरएम-2 के तहत तैयार स्टैंडर्ड डेमो बस सोमवार को शिमला पहुंच गई। ओल्ड बस स्टैंड में एचआरटीसी के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बस का निरीक्षण किया। जेएनएनयूआरएम -2 के तहत शिमला-सोलन कलस्टर को 90 मिडी बसें मिलनी हैं। इनमें से 65 बसें राजधानी शिमला में चलाई जाएंगी। बसों की पहली खेप नालागढ़ पहुंच चुकी है।
विज्ञापन
हादसों पर अंकुश लगाने के लिए जेएनएनयूआरएम-2 के तहत डिजाइन बसों को पैसेंजर सेफ्टी सिस्टम से लैस किया है। आरामदायक सफर के लिए बसों को लो फ्लोर डिजाइन किया है लेकिन पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण बसों की ग्राउंड क्लीयरेंस पर भी विशेष ध्यान दिया है।
विज्ञापन
जेएनएनयूआरएम के तहत मिलने वाली इन बसों के लिए 90 फीसदी बजट केंद्र सरकार और 10 फीसदी बजट प्रदेश सरकार की ओर से दिया है। नई बसों के लिए एचआरटीसी वर्कशापों का भी आधुनिकीकरण हो रहा है।
विज्ञापन
बसों के निर्बाध संचालन के लिए आईटीएस टर्मिनल और कंट्रोल सेंटर भी स्थापित जा रहे हैं। सोमवार को शिमला पहुंची डेमो बस निगम कर्मियों और स्थानीय लोगों के लिए कौतूहल का विषय बनी रहीं। पूरे दिन शहर के लोग अपने मोबाइल कैमरों से बस की फोटो लेते रहे।
डेमो बस पहुंची है शिमला: गुप्ता
जेएनएनयूआरएम-2 के तहत आधुनिक तकनीक और पैसेंजर सेफ्टी सिस्टम से लैस डेमो बस सोमवार को शिमला पहुंची है। दिल्ली और चंडीगढ़ के बाद शिमला में बस का डेमोस्ट्रेशन हुआ है। एचआरटीसी को मिलने वाली बसें इस बस से थोड़ी भिन्न है।
- एचके गुप्ता, महाप्रबंधक शहरी परिवहन, बस अड्डा प्रबंधन एवं विकास प्राधिकरण
दरवाजे बंद होने पर ही चलेगी बस
पैसेंजर सेफ्टी सिस्टम से लैस यह बसें दरवाजे पूरी तरह बंद होने पर ही चलेंगी। पूरी तरह ब्रेक लगने के बाद ही बस के दरवाजे खुलेंगे। बस के दरवाजों का कंट्रोल ड्राइवर के पास होगा।
बस के स्किड होने का खतरा नहीं
नई बसें स्किड होकर दुर्घटनाग्रस्त नहीं होंगी। यह बसें एंटी स्किड ब्रेकिंग सिस्टम (एबीएस) से लैस हैं। सर्दी में बर्फबारी के दौरान यह बसें सामान्य बसों के मुकाबले अधिक सुरक्षित तरीके से चलेंगी।
स्टैंडिंग सफर के लिए खुली जगह
मिडी बसों में खड़े होकर सफर करना भी सुविधाजनक होगा। बसों में सीटों के बीच गेलरी के लिए अधिक जगह रखी गई है। खड़े होकर सफर करने वालों के लिए विशेष रेलिंग लगाई गई हैं।
स्टेंडर्ड बस की और खासियतें
बस को जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) कनेक्टिविटी से जोड़ा गया है। कंट्रोल रूम में बैठे कर बस की पोजिशन, रफ्तार, ईंधन की खपत पर नजर रखी जा सकेगी।
ड्राइवर इलेक्ट्रानिक डिसप्ले
बस चलाते हुए पीछे देखने के लिए बस में सामने की ओर शीशा नहीं है। ड्राइवर के सामने स्टेयरिंग के साथ लगे इलेक्ट्रानिक डिसप्ले पर चालक बिना पीछे मुड़े सब कुछ देख सकेगा।
बसों में सीसीटीवी कैमरे
बस में फ्रंट और बैक दोनों ओर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। बस के भीतर होने वाली सभी गतिविधियों पर कैमरों से नजर रखी जा सकेगी। स्टाफ और यात्री यदि किसी प्रकार का दुर्व्यवहार करते हैं तो उसकी भी रिकार्डिंग होगी।
विकलांगों के लिए व्हील चेयर स्पेस
बसों में चढ़ते उतरते समय विकलांगों को पेश आने वाली समस्या का समाधान करने के लिए दरवाजों को व्हील चेयर स्पेस दिया है। जरूरत पड़ने पर बिना किसी समस्या के व्हील चेयर भी बस में चढ़ाई जा सकती है।
स्पीड लिमिटिंग सिस्टम
नई बसों को स्पीड लिमिटिंग सिस्टम से लैस किया है। चालक मनमानी रफ्तार पर बसों को नहीं दौड़ा सकते। एक सीमा के बाद बस की रफ्तार नहीं बढ़ती। इससे दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
इलेक्ट्रानिक रूट डिस्पले सिस्टम
बसों के भीतर और बाहर रूट डिस्पले सिस्टम लगाया है। इलेक्ट्रानिक रूट डिस्पले सिस्टम के जरिये यात्री बस का रूट जान सकेंगे। बस के भीतर भी इलेक्ट्रानिक डिस्पले लगाया है।