इस मशरूम से पूरी होगी अब विटामिन-डी की कमी, शोध में खुलासा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विटामिन-डी की कमी को अब स्टाके मशरूम पूरी करेगा। शोध के दौरान स्टाके मशरूम में बड़ी मात्रा में विटामिन-डी की मात्रा पाई गई है। यह स्टाके मशरूम देश के प्रतिष्ठित संस्थान सीएसआईआर-आईएचबीटी पालमपुर ने अपनी लैब में तैयार किया है।
विटामिन-डी की कमी को पूरा करने के लिए स्टाके मशरूम को सब्जी के रूप में खा सकते हैं। वहीं, जिसे मशरूम पसंद नहीं हैं, वह इसे कैप्सूल, टॉफी, चाकलेट या इसका सूप के रूप में भी सेवन कर सकते हैं। इसके उत्पाद भी आईएचबीटी ने तैयार किए हैं। इसे आईएचबीटी जल्द बाजार में भेजेगा।
हालांकि, स्टाके मशरूम बड़े जंगलों में भी पाया जाता है, लेकिन आईएचबीटी के शोध के मुताबिक इसमें अधिक विटामिन-डी नहीं होती। जंगलों में इसे तैयार होने में सात से आठ माह का समय लगता है। वहीं, आईएचबीटी ने इस मशरूम को अपनी लैब में दो माह में तैयार किया है।
भारत में लोग विटामिन-डी की कमी से जूझ रहे हैं। विदेशों सहित देश में अमीर लोग विटामिन-डी की कमी को पूरा करने के लिए समुद्र के किनारे या महंगे होटलों में सन बाथ भी करते हैं, लेकिन आम आदमी के लिए इस महंगी प्रक्रिया को वहन करना मुश्किल है।
संस्थान मार्केट का कर रहा है इंतजार: संजय
ऐसे में विटामिन-डी की कमी को पूरा करने के लिए स्टाके मशरूम प्रभावी विकल्प बन सकता है। पुणे (महाराष्ट्र) और नार्थ ईस्ट की एक कंपनी ने इसकी तकनीक को लिया है, लेकिन संस्थान चाहता है कि हिमाचल से कोई कंपनी इस तकनीक के लिए आगे आए।
इस संबंध में ऊना की एक कंपनी से बात चल भी रही है। स्टाके मशरूम का इस समय बाजार में करीब ढाई हजार रुपये एक किलो का मूल्य है। आईएचबीटी के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने कहा कि विटामिन-डी की कमी को पूरा करने के लिए आईएचबीटी ने स्टाके मशरूम तैयार किया है।
इसके खाने से विटामिन-डी की कमी पूरा किया जा सकता है। संस्थान इस मशरूम को बड़े पैमाने पर मार्केट में लाने के लिए किसी कंपनी का इंतजार कर रहा है। इस संबंध में कई कंपनियों से बात चल रही है।