कवायद: बद्दी-चंडीगढ़ के लिए जल्द बिछेगा ट्रैक, रेलवे के नाम होने लगी जमीन
बद्दी-बरोटीवाला उद्योग संघ ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए केंद्रीय बजट से उम्मीद लगाई है। बीबीएनआईए के अध्यक्ष राजेंद्र गुलेरिया ने बताया कि यहां से कंटेनर ट्रकों के माध्यम से अंबाला दिल्ली तक पहुंचाए जाते हैं, जो उद्योगपतियों को काफी मंहगे पड़ते हैं।
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हिमाचल प्रदेश के बद्दी से चंडीगढ़ के लिए रेलवे ट्रैक बिछाने का काम जल्द ही शुरू हो सकता है। इस ट्रैक के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन के 80 फीसदी किसानों को करीब 128 करोड़ रुपये मुआवजा दे दिया गया है। अब जमीन रेलवे के नाम करने के लिए इंतकाल की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जमीन रेलवे के नाम होते ही ट्रैक बिछाने का काम शुरू हो जाएगा। बद्दी-बरोटीवाला उद्योग संघ ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए केंद्रीय बजट से उम्मीद लगाई है। बीबीएनआईए के अध्यक्ष राजेंद्र गुलेरिया ने बताया कि यहां से कंटेनर ट्रकों के माध्यम से अंबाला दिल्ली तक पहुंचाए जाते हैं, जो उद्योगपतियों को काफी मंहगे पड़ते हैं।
सीआईआईए के हिमाचल चैप्टर के अध्यक्ष शैलेष अग्रवाल ने बताया कि अगर इस बजट में रेलवे लाइन के लिए पूरा पैसा स्वीकृत हो जाता है तो यहां पर एक साल के भीतर रेलवे लाइन तैयार हो सकती है। रेलवे लाइन आने से यहां पर व्यवसाय बढ़ जाएगा। यहां पर तैयार होने वाले उत्पादों का निर्यात व कच्चे माल का आयात भारी मात्रा में होता है। रेलवे लाइन आने से यह आसान हो जाएगा। यही नहीं, यहां पर केंद्र सरकार ने ड्राई पोर्ट बनाया है, जिस पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं। वर्तमान में इसे कोई काम नहीं मिलता है लेकिन रेलवे लाइन आने से इसको भी काम मिलना शुरू हो जाएगा।
चार हजार किसानों की जमीन अधिग्रहीत
रेलवे प्रोजेक्ट के तहत हिमाचल प्रदेश के नौ राजस्व गांवों की 33.75 हेक्टेयर जमीन आ रही है। इन गांवों में हरिपुर संडोली, बद्दी शीतलपुर, संडोली, चक जंगी, लंडेवाल, बिलांवली गुजरां, केंदूवाला, कल्याणपुर व स्वराज माजरा शामिल हैं। इन गांवों के करीब चार हजार किसानों की जमीन इस रेलवे लाइन के बीच में आई है। 80 फीसदी किसानों को मुआवजा दिया जा चुका है।