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पिघलते ग्लेशियरों के लिए संजीवनी बनी दिसंबर की बर्फबारी

Mon, 16 Dec 2019 11:30 AM IST
अरविन्द ठाकुर हरिराम चौधरी, अमर उजाला, सैंज (कुल्लू)
हरिराम चौधरी, अमर उजाला, सैंज (कुल्लू) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 16 Dec 2019 11:30 AM IST
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snowfall in december in himachal and relief for glacier survival
सांकेतिक तस्वीर

ग्लोबल वार्मिंग से हर वर्ष 17 से 21 मीटर की रफ्तार से सिकुड़ रहे ग्लेशियरों के लिए दिसंबर की ताजा बर्फबारी सुरक्षा दीवार का काम करेगी। वर्ष 2014 के बाद दिसंबर में हिमालय की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी ने 10 से 20 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित ग्लेशियरों की उम्र बढ़ा दी है। कुल्लू और लाहौल-स्पीति जिलों की ऊंची पहाड़ियों में कई जगह भारी बर्फबारी हुई है।

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विशेषज्ञों की मानें तो इससे पर्यावरण संतुलन साधने में मदद मिलेगी। कांगला ग्लेशियर, छोटा शिगरी, श्रीखंड महादेव, पाप-धर्म की चोटी, थिहणी जोत, हंसकुंड, तीर्थ जोत, लांबा लांबारी, ककटी ग्लेशियर, ड्रिलबू पीक, कुगती जोत, गंगस्टाग, कांगला, हनुमान टिब्बा, चंद्रखणी, खीरगंगा, रक्तिराहला आदि जोतों के बर्फ से लकदक होने से वहां पहले से मौजूद ग्लेशियरों के पिघल कर टूटने की रफ्तार में कमी आएगी। 
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जीबी पंत हिमालयन पर्यावरण एवं विकास संस्थान अल्मोडा में तैनात वरिष्ठ पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. जेसी कुनियाल पिछले कई सालों से ग्लेशियरों पर शोध कर रहे हैं। वह कहते हैं कि ताजा हिमपात से ग्लेशियरों को संजीवनी मिली है। यह कहना जल्दबाजी होगा कि इस हिमपात से नए ग्लेशियरों के निर्माण में मदद मिलेगी, मगर बर्फ के ये फाहे ग्लेशियरों को सिकुड़ने से बचाने के लिए सुरक्षा दीवार का काम करेंगे।

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यह है चिंता का कारण

डॉ. जेसी कुनियाल कहते हैं कि एक शोध में सामने आया है कि अगले दशक तक ग्लेशियर पिघल जाएंगे। जलवायु परिवर्तन के चलते हिमालय का ग्लेशियर और साउथ अमेरिका का एंडीज अगले दस सालों में गायब हो जाएगा। यहां पर मौजूद ऊष्म कटिबंधीय चट्टान जल्द ही ग्लेशियर में मिल जाएंगे।

यह शोध अमेरिका कि ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी ने जारी किया है। शोध में कहा गया है कि वर्ष 2015-2016 अल नीनो के कारण न्यू गिनी के पश्चिमी आधे भाग पर पहाड़ के शीर्ष ग्लेशियरों का पिघलना तेजी से बढ़ा है। अल नीनो एक ऐसी घटना जो उष्ण कटिबंधीय महासागर के पानी और वायुमंडलीय तापमान को गर्म करने का कारण बनती है।

शोध कर रहे विद्वान लोनी थॉम्पसन एस ने रिपोर्ट में कहा है कि यह घटना पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है। शोधकर्ता ग्लेशियर पर वर्ष 2010 से निगरानी कर रहे थे। कहा गया है कि ग्लेशियर की बर्फ हर दिन पिघल रही है। रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि विश्व स्तर पर ग्लेशियर पिघलने से समुद्र का जल स्तर बढ़ रहा है। डॉ. कुनियाल कहते हैं कि ताजा हिमपात इस चिंता से राहत प्रदान करता है।

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