हिमाचल में राज्य पशु के वजूद पर मंडराया बड़ा खतरा
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हिमाचल का राज्य पशु हिम तेंदुआ प्रदेश के पहाड़ों से गायब होने लगा है। ग्लोबल वार्मिगिं के चलते साल दर साल सिकुड़ रही स्नो लाइन से इस दुर्लभ प्रजाति पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
पिछले तीन दशक के दौरान हिम तेंदुओं की संख्या लगातार कम हो रही है। प्रदेश में कितने हिम तेंदुए हैं, इसका पता वन विभाग को भी नहीं है। इसकी गणना की अभी तक कोई व्यवस्था नहीं है।
वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत हिम तेंदुआ अति दुर्लभ श्रेणी में रखा गया है। हिमाचल में इसे राज्य पशु का दर्जा दिया गया है। लेकिन, राज्य पशु होने के बावजूद ये प्रजाति लुप्त हो रही है।
चूडधार से विलुप्त हुआ तेंदुआ
वर्ष 1980-82 तक सिरमौर की सबसे ऊंची चूड़धार की चोटियों पर भी देखा जाता रहा है, लेकिन अब यह यहां से विलुप्त हो गया। 9 जनवरी 2013 को एक हिम तेंदुआ चंबा जिले में कुगती वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी में देखा गया।
साल भर बर्फ से ढकी रहने वाली 3200 से 4200 मीटर ऊंची चोटियां हिम तेंदुए का आवास मानी जाती हैं। हिमालय पर्यावरण अध्ययन एवं सुरक्षा संगठन (हेस्को) के निदेशक डा. अनिल प्रकाश जोशी कहते हैं कि हिमालयी क्षेत्र में हिम तेंदुए आज भी विद्यमान हैं, लेकिन पर्यावरण असंतुलन के कारण उनके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।
पिछले तीन दशक में हिमालय की स्नो लाइन 2 से 5 किलोमीटर पीछे खिसक चुकी है। ऐसे में आजीवन बर्फ में रहने वाले हिम तेंदुए पर संकट मंडराना स्वाभाविक है।
1 साल में कैद हुईं तीन तस्वीरें
हिमाचल की स्पीति घाटी के किब्बर गांव में ‘हिमालयन स्नो लेपर्ड रिसर्च सेंटर’ काम कर रहा है। इसके लिए 5.15 करोड़ रुपये केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से मिले हैं। स्पीति क्षेत्र के हिम तेंदुए के संभावित विचरण क्षेत्रों में कैमरे लगाए गए हैं। इसमें एक वर्ष के भीतर तीन बार हिम तेंदुए की तस्वीर कैद हुई है।
हिमाचल के स्पीति, पांगी, नेशनल पार्क कुल्लू, पिन वैली, उत्तराखंड के हर्षिल, धौलागिरी, कंचनजंगा, चौखंबा के अलावा जम्मू-कश्मीर, सिक्किम एवं अरुणाचल देश में हिम तेंदुओं की कुल संख्या 200 से 250 रह गई है।
महज 12 देशों में पाया जाता है हिम तेंदुआ
विश्व के एक दर्जन
देशों में हिम तेंदुआ पाया जाता है। इनमें भारत प्रमुख है। आईयूसीएन
अंतरराष्ट्रीय संगठन ने विश्व में हिम तेंदुए की संख्या 4080 से 6590 बताई
है। हिमाचल में लाहौल, किन्नौर, पांगी, नौहराधार और ऊपरी क्षेत्रों में हिम
तेंदुआ देखा जाता रहा है।