यहां दिखे दुर्लभ भूरे भालू और बर्फानी तेंदुआ, कैमरों में कैद हुईं तस्वीरें
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हिमाचल के दुर्गम क्षेत्र में माने जाने वाले किन्नौर जिला के अभ्यारण्य क्षेत्र आसरंग लिप्पा और छितकुल कंडे में दुर्लभ भूरे भालुओं की मौजूदगी का पता चला है। वजूद की जंग लड़ रहे इस प्रजाति के दो भालू यहां पर देखे गए हैं। इनके अलावा बर्फानी तेंदुआ, ब्लैक बीयर, जंगली हिरण और तंगरोल के कई अन्य जानवरों की तस्वीरें भी कैमरे में कैद की गई हैं।
आसरंग लिप्पा और छितकुल कंडे में विभिन्न प्रजातियों के जानवरों की पहचान के लिए वन्य प्राणी मंडल सराहन ने कैमरे लगाए हैं। कैमरों की मदद से इन अभ्यारण्य क्षेत्रों में रहने वाले जानवरों की पहचान की जा सकेगी।
वन विभाग में कार्यरत वनरक्षक गोपाल नेगी ने बताया कि वन्य प्राणी मंडल द्वारा आसरंग लिप्पा कंडे में 8 कैमरे और छितकुल के रानी कंडा में तीन कैमरे लगाए हैं। इन कैमरों की मदद से क्षेत्र में पाए जाने वाले जानवरों की पहचान की जाएगी। लिप्पा और आसरंग कंडे में लगे कैमरों में कई जानवरों को कैद किया गया है।
जड़ी-बूटी निकालने वालों पर भी नजर
आसरंग लिप्पा कंडे में विभिन्न स्थानों पर कैमरे लगाकर वनों से होने वाली अवैध तस्करी और यहां पाई जाने वाली जड़ीबूटियां चुराने वालों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। लिप्पा आसरंग कंडे में पतीश, गुगल, चौरा, रतन जोत, जंगली लहसुन और अन्य बेशकीमती जड़ीबूटियां पाई जाती हैं। सांगला वैली के छितकुल कंडे में भी तीन कैमरों की मदद से वन्य प्राणी मंडल जानवरों की पहचान और अन्य गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
मुख्य अरण्यपाल वन्यप्राणी दक्षिण सुशील कापटा ने बताया कि मई माह के दौरान सराहन वन्यप्राणी मंडल के स्टाफ और भारतीय वन्यप्राणी संस्थान देहरादून के रिसर्चर अंकिता भट्टाचार्य और निलांजन चटर्जी की संयुक्त टीम ने तत्कालीन डीएफओ कुणाल अंग्रिश के नेतृत्व मे सेंक्चुरी में 8 कैमरा ट्रैप लगाए थे।
इन्हीं में से एक कैमरे में लगभग 4000 मीटर की ऊंचाई पर यह शर्मिला जंतु कैद हुआ। उन्होंने कहा कि यह खोज हिम तेंदुए के नए प्राकृतिक प्रवासों का पता लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।