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यहां दिखे दुर्लभ भूरे भालू और बर्फानी तेंदुआ, कैमरों में कैद हुईं तस्वीरें

Sun, 09 Sep 2018 01:57 PM IST
धर्मेंद्र बोज्ञाटो, अमर उजाला, आसरंग (किन्नौर)
धर्मेंद्र बोज्ञाटो, अमर उजाला, आसरंग (किन्नौर) Updated Sun, 09 Sep 2018 01:57 PM IST
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Snow leopard and Bear pictures in CCTV Camera at kinnaur himachal pradesh

हिमाचल के दुर्गम क्षेत्र में माने जाने वाले किन्नौर जिला के अभ्यारण्य क्षेत्र आसरंग लिप्पा और छितकुल कंडे में दुर्लभ भूरे भालुओं की मौजूदगी का पता चला है। वजूद की जंग लड़ रहे इस प्रजाति के दो भालू यहां पर देखे गए हैं। इनके अलावा बर्फानी तेंदुआ, ब्लैक बीयर, जंगली हिरण और तंगरोल के कई अन्य जानवरों की तस्वीरें भी कैमरे में कैद की गई हैं।

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आसरंग लिप्पा और छितकुल कंडे में विभिन्न प्रजातियों के जानवरों की पहचान के लिए वन्य प्राणी मंडल सराहन ने कैमरे लगाए हैं। कैमरों की मदद से इन अभ्यारण्य क्षेत्रों में रहने वाले जानवरों की पहचान की जा सकेगी।
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वन विभाग में कार्यरत वनरक्षक गोपाल नेगी ने बताया कि वन्य प्राणी मंडल द्वारा आसरंग लिप्पा कंडे में 8 कैमरे और छितकुल के रानी कंडा में तीन कैमरे लगाए हैं। इन कैमरों की मदद से क्षेत्र में पाए जाने वाले जानवरों की पहचान की जाएगी। लिप्पा और आसरंग कंडे में लगे कैमरों में कई जानवरों को कैद किया गया है।

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जड़ी-बूटी निकालने वालों पर भी नजर

Snow leopard and Bear pictures in CCTV Camera at kinnaur himachal pradesh

आसरंग लिप्पा कंडे में विभिन्न स्थानों पर कैमरे लगाकर वनों से होने वाली अवैध तस्करी और यहां पाई जाने वाली जड़ीबूटियां चुराने वालों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। लिप्पा आसरंग कंडे में पतीश, गुगल, चौरा, रतन जोत, जंगली लहसुन और अन्य बेशकीमती जड़ीबूटियां पाई जाती हैं। सांगला वैली के छितकुल कंडे में भी तीन कैमरों की मदद से वन्य प्राणी मंडल जानवरों की पहचान और अन्य गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

मुख्य अरण्यपाल वन्यप्राणी दक्षिण सुशील कापटा ने बताया कि मई माह के दौरान सराहन वन्यप्राणी मंडल के स्टाफ और भारतीय वन्यप्राणी संस्थान देहरादून के रिसर्चर अंकिता भट्टाचार्य और निलांजन चटर्जी की संयुक्त टीम ने तत्कालीन डीएफओ कुणाल अंग्रिश के नेतृत्व मे सेंक्चुरी में 8 कैमरा ट्रैप लगाए थे।

इन्हीं में से एक कैमरे में लगभग 4000 मीटर की ऊंचाई पर यह शर्मिला जंतु कैद हुआ। उन्होंने कहा कि यह खोज हिम तेंदुए के नए प्राकृतिक प्रवासों का पता लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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