गले की फांस बनी स्मार्ट स्कूल वर्दी, अब ब्याज की राशि को लेकर छिड़ी जंग
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को निजी स्कूलों की तर्ज पर स्मार्ट कलरफुल वर्दी देने का मामला शिक्षा विभाग और खाद्य आपूर्ति निगम के गले की फांस बन गया है। अटल वर्दी योजना के तहत इस साल वर्दी देने में नाकाम साबित हो रहे दोनों महकमों में अब कंपनियों की ब्याज राशि को लेकर जंग छिड़ गई है। खाद्य आपूर्ति निगम ने ब्याज चुकाने को शिक्षा विभाग को बीते दिनों पत्र भेजा है।
निगम का पत्र मिलने के बाद शिक्षा सचिव ने ब्याज देने से इनकार कर दिया है। शिक्षा सचिव का तर्क है कि हमारे पास जब धरोहर राशि ही नहीं है तो ब्याज हम क्यों दें। उन्होंने बताया कि निगम को इस बाबत स्पष्ट कर दिया गया है। शिक्षा विभाग ने वर्दी खरीद के लिए सिर्फ बजट देना है। स्मार्ट स्कूल वर्दी के टेंडर के लिए आवेदन करने वाली पांच कंपनियों ने खाद्य आपूर्ति निगम को नोटिस देकर 20 फीसदी ब्याज समेत धरोहर राशि मांगी है।
टेंडर में 6 कंपनियों ने हिस्सा लिया था। जिस कंपनी के साथ सहमति बनी, उसके अलावा हर कंपनी ने 1 करोड़ 27 लाख रुपये ब्याज समेत मांगे हैं। 18 मई 2018 को वर्दी के टेंडर आमंत्रित किए गए थे। इसमें 6 कंपनियों ने हिस्सा लिया। टेंडर की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आवेदन करने वाली कंपनियों की धरोहर राशि 15 दिन के भीतर लौटानी होती है। लेकिन स्कूल वर्दी का मामला उलझने से अब 20 फीसदी ब्याज समेत धरोहर राशि लौटाने को लेकर मामला गर्मा गया है।
इस साल वर्दी मिलने पर संशय
सरकारी स्कूलों में इस साल वर्दी आवंटन को लेकर संशय है। शीतकालीन स्कूलों का सत्र दिसंबर अंत में समाप्त हो जाएगा। आने वाले दिनों में यह मामला सुलझ भी जाए तो भी वर्दी खरीद में कम से कम डेढ़ माह का समय लगेगा। ऐसे में इस साल वर्दी बंटना मुमकिन नहीं है।
विभागीय लड़ाई में फंसी सरकारी योजना- प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही जयराम सरकार ने सरकारी स्कूलों में इनरोलमेंट बढ़ाने के लिए स्मार्ट वर्दी शुरू करने का फैसला लिया था लेकिन विभागीय लड़ाई के चलते सरकार की यह योजना अधर में फंस गई है।