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स्मार्ट रोड मॉनिटरिंग सिस्टम: तीखे मोड़ों पर धुंध में सामने से आने वाले वाहनों का लगेगा पता, मिलेगी चेतावनी
Tue, 17 Aug 2021 11:38 AM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, मंडी
अमर उजाला नेटवर्क, मंडी
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 17 Aug 2021 11:38 AM IST
सार
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के शोधार्थियों ने स्मार्ट रोड मॉनिटरिंग सिस्टम ईजाद किया है। इसका फायदा वाहनों में एक विशेष प्रकार का उपकरण लगाकर उठाया जा सकेगा।
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आईआईटी मंडी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के शोधार्थी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अब पहाड़ी क्षेत्रों में सर्पीली सड़कों पर वाहन चलाना सुरक्षित होगा। खतरनाक मोड़ों में धुंध, बर्फ और खराब मौसम में भी सामने से आने वाले वाहनों की संख्या, गति और दिशा की चेतावनी चालक को मिल जाएगी। इससे हादसों को टाला जा सकेगा। यह स्मार्ट रोड मॉनिटरिंग सिस्टम से संभव हो सकेगा। इसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के शोधार्थियों ने ईजाद किया है।
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इसका फायदा वाहनों में एक विशेष प्रकार का उपकरण लगाकर उठाया जा सकेगा। यह जीपीएस की तरह काम करेगा। प्रोटोटाइप की लागत 20 हजार रुपये से भी कम आई है। इसके व्यापारिक पहलुओं पर काम किया जा रहा है। उत्पादन लागत कम करने के लिए सौर ऊर्जा आधारित तकनीक पर काम किया जा रहा है। शोधकर्ताओं का दावा है कि यह तकनीक तीखे मोड़ों पर दुर्घटनाओं का खतरा कम करेगी। यातायात प्रबंधन में कर्मचारियों की तैनाती भी कम होगी।
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सिस्टम यांत्रिक प्रकृति का है। इसलिए बारिश, बर्फ, कोहरे या खराब रोशनी सहित किसी भी मौसम में काम कर सकता है। इसका को एन्क्रिप्ट भी किया जा सकता है और साझा किया जा सकता है। वर्तमान में यातायात पुलिस की मदद, कन्वेक्स मिरर और अन्य तकनीकें सहायक हैं।
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वाहन के भार का भी लगाया जा सकेगा पता
यह सिस्टम मोड़ पर चेतावनी देने के साथ वाहनों की गिनती का काम भी करेगा। इसका एडवांस्ड वर्जन वाहन के भार का पता लगाने में सक्षम होगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निगिं टूल्स लगाकर इस डाटा के उपयोग से यातायात प्रबंधन, सड़क के उपयोग, सिंगल लाइन सुरंगों से यातायात और प्रतिबंधित क्षेत्रों में यातायात नियंत्रण किया जा सकता है। पर्याप्त डाटा एकत्र होने के बाद ट्रैफिक जाम, यातायात में वृद्धि और डायवर्जन की चेतावनी भी दी जा सकती है।
टीम के साथ एकमॉनिटरिंग सिस्टम ईजाद किया है। इसमें माइक्रो-इलेक्ट्रो-मेकेनिकल सिस्टम (एमईएमएस) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर गति का पता लगाने, वाहनों की संख्या जानने, सड़क के बेहतर नियंत्रण और उपयोग में मदद मिलेगी। टीम में मेकेनिकल इंजीनियरिंग के नमन चौधरी, शिशिर अस्थाना, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के अमुधन मुथैया और सिविल इंजीनियरिंग की निधि कडेला शामिल हैं।
- डॉ. कला वेंकट उदय, सहायक प्रोफेसर, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग