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Smart City Shimla: सरकारी विभागों को करोड़ों रुपये का शुल्क देने से स्मार्ट सिटी का इनकार

Sat, 24 Dec 2022 04:11 PM IST
शिमला ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: शिमला ब्यूरो Updated Sat, 24 Dec 2022 04:11 PM IST
सार

लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, वन विभाग एनएचएआई, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग समेत आधा दर्जन से ज्यादा सरकारी महकमों को स्मार्ट सिटी मिशन ने विभागीय शुल्क न देने का फैसला लिया है।

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Smart city refuses to pay crores of rupees to government departments
नकदी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शिमला में स्मार्ट सिटी मिशन के कार्यों को करवा रहे सरकारी महकमों को अब विभागीय शुल्क नहीं मिलेगा। लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, वन विभाग एनएचएआई, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग समेत आधा दर्जन से ज्यादा सरकारी महकमों को स्मार्ट सिटी मिशन ने विभागीय शुल्क न देने का फैसला लिया है। इन महकमों को विभागीय शुल्क न देने से स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के करीब 30 करोड़ रुपये बचेंगे जिन्हें अब जनता से जुड़े कार्यों पर खर्च किया जाएगा। शहर में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 100 से अधिक काम चल रहे हैं जिन पर करीब 700 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं।

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पहले फैसला लिया था कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का काम करवाने वाले सभी सरकारी महकमों को 9 फीसदी विभागीय शुल्क दिया जाएगा। प्रोजेक्ट पर खर्च होने वाली राशि का नौ फीसदी हिस्सा संबंधित महकमे को विभागीय शुल्क के तौर पर दिया जाएगा लेकिन अब इसमें बदलाव कर दिया है। स्मार्ट सिटी के निदेशक मंडल ने भी इसे मंजूरी दे दी है और अब इसे लागू कर दिया है। हालांकि, कई विभाग विभागीय शुल्क न मिलने से निराश भी हैं। कार्पोरेशन को पांच फीसदी विभागीय शुल्क दिया जाएगा। पहले कार्पोरेशन को नौ फीसदी विभागीय शुल्क दिया जाना था। इसमें भी चार फीसदी की कटौती की गई है। शहर में रोपवे ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन लिफ्ट, एस्केलेटर, वॉकवे, केबल ओवरब्रिज जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट पर काम करवा रहा है। एचपीआरआईडीसी ढली टनल समेत फ्लाईओवर प्रोजेक्टों पर काम कर रहा है। इन कार्पोरेशन को पांच फीसदी विभागीय शुल्क मिलेगा।
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जनता के कामों पर खर्च हो सकेगा यह पैसा
शिमला स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के कई कामों में अब पैसों की कमी आड़े आ रही है। ढली टनल, रिज प्रोजेक्ट, विधानसभा फ्लाईओवर समेत कई कामों में बजट कम पड़ गया है। केंद्र ने भी स्पष्ट कर दिया है कि 500 करोड़ रुपये से ज्यादा एक भी पैसा नहीं मिलेगा। ऐसे में विभागीय शुल्क न देने से बचने वाला पैसा इन कामों पर खर्च किया जा सकेगा। पहले यह करोड़ों रुपया विभागों के खातों में जमा होना था। अब स्मार्ट सिटी प्रबंधन के इस फैसले से जनता को फायदा होगा।
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सरकारी विभागों को नहीं मिलेगा शुल्क
सरकारी विभागों को अब विभागीय शुल्क नहीं दिया जाएगा। निदेशक मंडल ने पहले ही इस पर फैसला ले लिया है। कार्पोरेशन को भी अब नौ की जगह पांच फीसदी विभागीय शुल्क दिया जाएगा।-अजीत भारद्वाज, महाप्रबंधक शिमला स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट

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