रिटेल डिमांड में गिरावट से हांफा देश का सबसे बड़ा फार्मा उद्योग
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देश में दवा उत्पादन में 35 फीसदी फार्मा प्रोडक्शन शेयर कब्जाने वाले जिला सोलन के बद्दी-बरोटीवाला और नालागढ़ फार्मा हब में नोटबंदी का असर अब दिखने लगा है। एक अनुमान के मुताबिक एक माह में दवा की रिटेल डिमांड 25-30 फीसदी गिर गई है। इसका असर सीधे सप्लाई पर हुआ है।
दवा सप्लायर उत्पादनकर्ता की मेन्युफेक्चरिंग 20 फीसदी तक गिरी है। एमएनसी (मल्टीनेशनल कंपनी) से लेकर नेशनल दवा उद्योगों में नोटबंदी के बाद के ये साइड इफेक्ट अब दिखने लगे हैं। कैश कम होने से परचेजिंग कैपेसेटी घटी है। हालांकि, यह गिरावट टेंपरेरी है, लेकिन आने वाले दिनों में यह अस्थिरता बढ़कर उद्यमियों को परेशानी में डाल सकती है।
उद्यमियों का कहना है कि रोगी दवा तो लेगा ही, लेकिन पहले रिटेल में बल्क में एक या दो माह की दवा रिटेलर से उठा ली जाती थी। इससे रिटलेर डिस्ट्रीब्यूटर को भी दिल खोल के ऑर्डर देता था, अब नोटबंदी के बाद डिमांड कम होने से गिरावट शुरू हो चुकी है।
लेबर की कमी से गिरा उत्पादन
उद्यमियों का तर्क है कि रिटेल डिमांड कम होने से उत्पादन का गिरना लाजमी है। लेबर न मिलने से भी डिमांड में गिरावट दर्ज हुई है। नोटबंदी के बाद कैश पेमेंट अधिकांश उद्यमियों ने बंद कर दी है। थर्ड टायर लेबर यानी कांट्रेक्टर के थ्रू रखी गई लेबर को भी पेमेंट नहीं मिल सकी है।
अगर मिली है तो बैंक चैक के माध्यम से। घर चलाने के लिए लेबर क्लास पूरे दिन बैंक में खड़े होकर चैक कैश या पुराने नोट चेंज करने में गुजार रहे हैं। लेबरर की प्रेजेंट कम हो चुकी है। अनस्किल्ड लेबरर के पांच पांच घंटे बैंकों की लाइनों में खड़े होकर कट रहे हैं।
हिमाचल में फार्मा उद्योगों पर एक नजर
जिला सोलन समेत हिमाचल में करीब 700 फार्मा उद्योग हैं। इनमें 80 फीसदी सोलन के बद्दी-बरोटीवाला और नालागढ़ में हैं। करीब 21000 अनस्किल लेबर इन उद्योगों में काम कर रहा है। इसमें हिमाचलियों के अलावा देश के कोने-कोने से लेबरर काम करती है। 700 फार्मा उद्योग में कई ऐसी कंपनियां भी हैं, जो थर्ड लाइसेंस पार्टी हैं और किसी अन्य के लिए जाब वर्क करती हैं।
30 लाख करोड़ सालाना टर्नओवर
बीबीएन समेत प्रदेश देश की सबसे बड़ी फार्मा इंडस्ट्री के रूप में उभर रहा है। ड्रग्स मेन्युफेक्चरर एसोसिएशन के आंकड़ों की मानें तो देश के कुल दवा उत्पादन में 35 फीसदी प्रोडक्शन हिमाचल से है। कुल करीब 01 लाख करोड़ की इंडस्ट्री है। जो सालाना 30 लाख करोड़ की टर्नओवर देती है।
टेंपरेरी है उत्पादन में गिरावट: गोयल
हिमाचल ड्रग्स मेन्युफेक्चरर एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकुट बिहारी गोयल के मुताबिक रिटेल डिमांड कम होने से उत्पादन गिरा है, लेकिन यह टेंपरेरी है। नोटबंदी का फैसला सही है, लेकिन कुछ समय के लिए इसके असर तो देखने को मिलेंगे। 20 फीसदी तक उत्पादन गिरा कहा जा सकता है।
नोटबंदी के बाद लोगों की परचेंजिंग कैपेसिटी कम हुई है। एसोसिएशन के राज्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष नीरज भाटिया ने भी कहा कि दवा बिक्री के बाद पैसे की रिकवरी करना मुश्किल हो गया है। सभी कर्मचारियों के खाते खुले नहीं हैं। उन्हें वेतन देना मुश्किल हो गया है। दवा उत्पादन पर भी इसका असर पड़ेगा और इसकी मांग पर भी पडे़गा।