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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   Size of Lambaleshwar Mahadev temple Shivling increases after every four years

Himachal News: इस प्राचीन मंदिर में हर चार साल के बाद बढ़ता है शिवलिंग का आकार, पढ़ें रोचक जानकारी

Tue, 25 Jul 2023 02:51 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, हमीरपुर
अमर उजाला नेटवर्क, हमीरपुर Published by: Krishan Singh Updated Tue, 25 Jul 2023 02:51 PM IST
सार

 हिमाचल में ऐसे सैंकड़ों मंदिर हैं जिनकी पौराणिक मान्यताएं और दैवीय शक्तियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

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Size of Lambaleshwar Mahadev temple Shivling increases after every four years
लंबलेश्वर महादेव मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देवभूमि हिमाचल प्रदेश के कई मंदिर रहस्यों से भरे पड़े हैं। इन मंदिरों से जुड़ी देव आस्था की बातें हर किसी को हैरान कर देती हैं। हिमाचल में ऐसे सैंकड़ों मंदिर हैं जिनकी पौराणिक मान्यताएं और दैवीय शक्तियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

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प्रदेश के विधानसभा क्षेत्र नादौन शहर के पत्तन बाजार के समीप बना लंबलेश्वर महादेव मंदिर यहां का सबसे प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर लगभग 400 वर्ष पुराना है। इस मंदिर का निर्माण राजा राजेंद्र चंद कटोच की ओर से करवाया गया। इस मंदिर की स्थापना के पीछे एक पौराणिक मान्यता है।
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मान्यता के अनुसार राजा राजेंद्र चंद कटोच को एक रात को सोते समय सपना आया, जिसमें कि ब्यास नदी के किनारे उन्हें एक शिवलिंग की बात का पता चला। राजा ने अपने सैनिक भेजकर इस शिवलिंग को खोजा और वहीं पर कटोच वंश की ओर से इस मंदिर की स्थापना की गई।

जिसे आज लंबलेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग की विशेषता यह है कि यह हर चार वर्ष के बाद शिवरात्रि वाले दिन एक चावल के दाने जितना आकार बढ़ा लेता है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति सावन के महीने में विधि-विधान से लगातार 40 दिन इस मंदिर में पूजा-अर्चना करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है।

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इस मंदिर के प्रांगण में राधा-कृष्ण, शिव परिवार, गणपति महाराज, शनिदेव और शीतला माता की मूर्तियां प्रतिष्ठित हैं। शिवरात्रि के दिन इस मंदिर में दूर-दूर से लोग आते हैं और हर वर्ष यहां भंडारे का आयोजन किया जाता है। इस मंदिर की शैली बैजनाथ में स्थित शिव मंदिर से ली गई है, उसी शैली में इसे बनवाया गया है जो कि आज भी पहले जैसा ही है।

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