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घर के आंगन से छह साल की मासूम को उठा ले गया तेंदुआ

Mon, 05 Oct 2015 07:25 PM IST
Updated Mon, 05 Oct 2015 07:25 PM IST
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six-year-old girl dragged to his death by leopard.

छह साल की बच्ची को तेंदुआ आंगन से उठाकर ले गया। सुबह जंगल से बच्ची का क्षत-विक्षत शव मिला। क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है। मामला हिमाचल के शिमला का है। अपर शिमला में बीते 12 दिनों में आदमखोर तेंदुओं ने दो बच्चों को शिकार बनाया है।

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रामपुर के झाकड़ी में तीन साल के मासूम को घर से उठाने के बाद रविवार शाम को कोटखाई से भी छह साल की बच्ची को तेंदुआ आंगन से उठाकर ले गया। घटना रामनगर पंचायत के बघेड़ी गांव की है। सोमवार सुबह जंगल से बच्ची का क्षत-विक्षत शव मिला। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया है। वन विभाग ने तेंदुआ को पकड़ने के लिए बघेड़ी गांव में पिंजरा लगाया है। क्षेत्र में दहशत का माहौल है।
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घास काटने गए थे माता-पिता, बच्ची को आंगन से उठा ले गया आदमखोर

six-year-old girl dragged to his death by leopard.

रविवार शाम बघेड़ी निवासी कमल बहादुर और उनकी पत्नी घास काटने गए थे। उनकी छह वर्षीय बेटी पूजा आंगन में खेल रही थी। इसी दौरान एक आदमखोर तेंदुआ बच्ची को उठाकर ले गया है। कुछ देर बाद जब पूजा के माता-पिता घर आए तो बच्ची को लापता पाकर उन्होंने गांव में तलाश शुरू की। जंगल और आसपास के क्षेत्रों में भी पूजा का कोई अता-पता नहीं चला। इसकी सूचना पुलिस को दी गई। सोमवार सुबह 7.30 बजे बच्ची की तलाश में निकले स्थानीय लोगों ने जंगल में तेंदुआ देखा और उसका पीछा किया।

कुछ दूरी पर जंगल में उन्हें बच्ची का क्षत-विक्षत शव मिला। डीएफओ ठियोग केआर कौंडल ने बताया कि बच्ची के परिजनों को तीस हजार रुपये की फौरी राहत दी गई है। तेंदुए को पकड़ने के लिए गांव में पिंजरा लगाया गया है। कोटखाई पुलिस थाना प्रभारी धर्म सेन नेगी ने बताया कि मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।

दहशत में लोग, घर से निकलने में लग रहा डर

six-year-old girl dragged to his death by leopard.

दो बच्चों को बनाया शिकार- अप्रैल माह में ही खनेरी में तेंदुए ने एक मासूम बच्चे को अपना शिकार बनाया था। 23 सितंबर को भी झाकड़ी में तेंदुए ने घर के आंगन से ही तीन वर्षीय बच्चे को उठाकर मौत के घाट उतार दिया था। रामपुर खंड में बीते दो साल से जंगली जानवरों द्वारा हमला करने के दर्जन भर मामले आ चुके हैं। क्षेत्र के शिंगला, डंसा, गौरा, झाकड़ी, खनेरी, ज्यूरी आदि स्थानों में तेंदुए और भालुओं के हमलों की कई वारदातें पेश आ चुकी हैं।

कोटखाई क्षेत्र में तेंदुए का किसी इंसान पर हमला करने का पहला मामला सामने आने से लोगों में दहशत का माहौल है। हालांकि रामनगर पंचायत सहित आसपास के क्षेत्रों में कई बार स्थानीय लोगों ने तेंदुए को पहले भी देखा है। इस संबंध में ग्रामीणों ने पहले भी कई बार वन विभाग को अवगत करवाया। लेकिन इस बारे में कोई कार्रवाई नहीं की गई। रविवार देर शाम छह वर्षीय बच्ची को घर के आंगन से उठाकर ले जाने की घटना के बाद ग्रामीण बुरी तरह सहम गए हैं। स्थानीय लोग शीघ्र से शीघ्र आदमखोर तेंदुए को पकड़ने की मांग उठा रहे हैं।

तेंदुए के हमले के बाद बघेड़ी गांव सहित रामनगर पंचायत के सभी लोग भयभीत भी हैं। हालांकि वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए बघेड़ी गांव में पिंजरा तो लगा दिया है। लेकिन स्थानीय ग्रामीण पहली बार सामने आई इस तरह की घटना से हैरान है। इस घटना के बाद ग्रामीण जंगल के पास लगते अपने बागीचों में जाने से भी घबरा रहे हैं। ग्रामीणों को डर है कि अगर समय रहते तेंदुए को नहीं पकड़ा गया, तो तेंदुआ फिर से गांव में घुसकर लोगों पर हमला कर सकता है।

डीएफओ ठियोग केआर कौंडल ने बताया कि पहले कभी भी क्षेत्र में इस तरह का कोई मामला सामने नहीं आया। क्षेत्र में तेंदुए के हमले का यह पहला मामला है। वन विभाग तेंदुए को पकड़ने का प्रयास कर रही है। तेंदुए को पकड़ने के लिए गांव में पिंजरा लगा दिया गया है। शीघ्र ही तेंदुए को पकड़ा जाएगा। रामनगर पंचायत के प्रधान अंबादत्त शर्मा ने बताया कि तेंदुए के हमले के बाद से ग्रामीणों में खौफ है। उन्होंने मांग उठाई है कि जल्द तेंदुए को पकड़ा जाए।

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रामपुर में डर के साए में जी रहे ग्रामीण

six-year-old girl dragged to his death by leopard.

रामपुर खंड के कई इलाकों में जंगली जानवर रिहायशी इलाकों में घुसकर आतंक मचा रहे हैं। स्थिति यह है कि जंगली जानवरों ने कुछ माह में ही कई स्थानों पर खूनी वारदातों को अंजाम देकर ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा दी है। हालांकि हाल ही में वन विभाग ने पिंजरा लगाकर एक तेंदुए को पकड़ने में कामयाबी हासिल कर ली थी। लेकिन अभी भी ग्रामीणों को जंगली जानवरों के डर के साये में जीने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अलावा क्षेत्र में भालू का आतंक भी बढ़ रहा है।

एक साल में भालुओं ने शिंगला, झाकड़ी और गोरा में हमले कर आधा दर्जन लोगों को घायल किया। इसके अलावा ये फसलों और पालतू जानवरों को भी निशाना बना रहे हैं। एक के बाद एक जंगली जानवरों के हमलों से वन विभाग के भी पसीने छूट गए हैं। विभाग की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जहां भी जंगली जानवर ने खूनी वारदात को अंजाम दिया है, वहां उन जानवरों को कैसे पकड़ा जाए।

जब खनेरी में तेंदुए ने एक मासूम को मारा था तब वन विभाग को देहरादून से शूटर बुलाने पड़े थे। हालांकि अभी यह भी साफ नहीं है कि क्षेत्र में घूमने वाले जंगली जानवरों की तादात कितनी है। जंगलों का लगातार कटना जंगली जानवरों को रिहायशी इलाकों में आने के लिए मजबूर कर रहा है।

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