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सरकारी स्कूलों के छह फीसदी विद्यार्थी अभी भी पढ़ाई से वंचित, सर्वे में खुलासा

Sat, 08 Aug 2020 12:07 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 08 Aug 2020 12:07 PM IST
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Six percent of students of govt schools still deprived of education, survey revealed
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

हिमाचल के सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले 94 फीसदी विद्यार्थी व्हाट्सएप से ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं। समग्र शिक्षा अभियान में गूगल फार्म से सभी 12 जिलों में कुल 4100 बच्चों पर किए गए सर्वे में यह खुलासा हुआ है। शेष छह फीसदी बच्चे स्मार्ट मोबाइल फोन नहीं होने के चलते अभी पढ़ाई से वंचित हैं। सर्वे में बताया गया है कि 92 फीसदी बच्चे रोजाना वर्कशीट हल कर रहे हैं। 61 फीसदी बच्चे साप्ताहिक टेस्ट दे रहे हैं।

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समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक आशीष कोहली ने बताया कि कुल 4100 बच्चों पर किए गए सर्वे में 90 फीसदी बच्चों से मौके पर जाकर बात की गई जबकि दस फीसदी बच्चों से फोन पर जानकारी ली गई। समग्र शिक्षा की ओर से हर घर पाठशाला में भेजी जा रही पठन सामग्री के उपयोग व प्रभाव को जानने के लिए यह सर्वेक्षण किया गया। कोविड 19 की वजह से सुरक्षा का ध्यान रखते हुए सर्वेक्षण को गूगल फार्म की ओर से किया गया। सर्वेक्षण जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान के अनुसंधान एवं मूल्यांकन प्रभारी की ओर से किया गया। इसमें 13.5 फीसदी शहरी और 86.5 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों ने भाग लिया।
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सर्वेक्षण के अनुसार 94 फीसदी बच्चे व्हाट्सएप से हर घर पाठशाला से जुड़े हैं।  हर घर पाठशाला व्हाटसएप माध्यम से नहीं जुड़ने वाले बच्चों के पास मोबाइल फोन का नहीं होना मुख्य कारण है। 92.7 फीसदी बच्चों ने जवाब दिया के वे वर्कशीट को हल करते है जबकि 7.1 फीसदी बच्चे इसे हल नहीं करते है। इसी तरह से हर घर पाठशाला वेबसाइट पर उपलब्ध वीडियो को 86.6 फीसदी बच्चे देखते हैं। 13.4 फीसदी बच्चों का कहना है कि वे वेबसाइट पर उपलब्ध वीडियो को नहीं देखते हैं। 61 फीसदी बच्चे शनिवार को आयोजित होने वाली व्हाट्सएप प्रश्नोत्तरी में भाग लेते हैं। 39 फीसदी बच्चे भाग नहीं लेते है।

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सर्वे में अभिभावकों ने ऑनलाइन पढ़ाई के लिए दिए ये सुझाव

सरकार बच्चों को स्मार्टफोन उपलब्ध करवाए।
इंटरनेट का डाटा प्प्लान छात्रों के लिए सस्ता हो।
अध्यापक कम से कम सप्ताह में एक बार छात्रों तक पहुंचें।
वीडियो ज्यादा लंबे नहीं होने चाहिए।
प्रश्नोत्तरी में हर विषय के सवाल शामिल होने चाहिए।
ऑनलाइन टेस्ट की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।
वर्कशीट को पहले के मुकाबले कम किया जाए।

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