कुल्लू दशहरा के समापन पर सीएम वीरभद्र सिंह ने की बड़ी घोषणा
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अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा के समापन पर सीएम वीरभद्र ने देवताओं के लिए बड़ी घोषणा की है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शुक्रवार को कलाकेंद्र पहुंचकर उत्सव के समापन समारोह की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर देवी देवताओं के नजराने में छह प्रतिशत बढ़ोतरी की घोषणा की।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने गैर माफीदार देवी देवताओं की पूजा पद्वति के लिए हर माहल एक-एक हजार रुपये देने की भी घोषणा की। इस अवसर पर कुल्लू दशहरा समिति के अध्यक्ष एवं डीसी कुल्लू युनूस ने मुख्यमंत्री को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने दशहरा समिति की स्मारिका का भी विमोचन किया। मेले में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया।
दशहरा में इस बार भी नहीं हो सकी पशु बलि
कुल्लू। सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम राहत के बावजूद दशहरा में पशु बलि की परंपरा नहीं निभाई जा सकी। कोर्ट ने बलि प्रथा को निभाने के लिए कुछ औपचारिकताएं पूरी करने के लिए कहा था। ये औपचारिकताएं पूरी नहीं होने के कारण पशु बलि को टालना पड़ा। हाईकोर्ट की रोक के बाद सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिलने पर परंपरा के अनुसार इस बार चार साल बाद दशहरा उत्सव में माता हिडिंबा को अष्टांग बलि समर्पित की जानी थी।
लंका दहन के साथ ही अंतरराष्ट्रीय दशहरा का समापन
लंका दहन के साथ सात दिन तक चले अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का समापन हो गया। जिला कुल्लू के अधिष्ठाता भगवान रघुनाथ सहित प्रमुख देवी-देवता लंका दहन की परंपरा निभाने के लिए ढालपुर के कैटल मैदान पहुंचे। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव का विधिवत समापन किया।
इसके बाद दोपहर बाद करीब तीन बजे तक उत्सव के अंतिम दिन देवी-देवताओं तथा राज परिवार की ओर से सभी रस्मों का निर्वहन किया गया। इनमें करीब दो दर्जन देवी-देवताओं ने भाग लिया।
करीब एक घंटा तक लंका दहन की प्रक्रिया चली। इसके बाद भगवान रघुनाथ अपने रथ पर सवार हुए और रथ मैदान से देव परंपरा के अनुसार गाजे-बाजे के साथ पुलिस के कड़े पहरे में रघुनाथपुर के लिए रवाना हुए।
250 देवी-देवता हुए शामिल
इस दौरान दर्जन भर देवी-देवता भी उनके साथ रहे। अठारह करडू की सौह फिर से जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठी। इस बार अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव में पहली बार रिकॉर्ड 250 देवी-देवता शामिल हुए, लेकिन लंका दहन में करीब दो दर्जन देवी-देवता शामिल हुए। लंका दहन के इस भव्य नजारे के स्थानीय लोगों के साथ-साथ देशी-विदेशी सैलानी भी गवाह बने।
उन्होंने इस अलौकिक दृश्य को अपने कैमरों और मोबाइल में कैद किया। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के समापन पर भगवान रघुनाथ के देवालय लौटने तथा सैकड़ों देवी-देवताओं के बिछोह से कई लोग भावुक हो गए।