हिमाचल की वादियों में राइजिंग मलंग की धूम, यहां जानिए पूरा मामला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल की वादियों में राइजिंग मलंग की धूम मची है। खादी कुर्ता और जीन के अलावा गले में सिरोपा पहने दो युवाओं की जोड़ी जब हारमोनियम और गिटार लेकर सूफी तराना छेड़ती है तो सोशल मीडिया पर इन्हें सुनने के लिए लोग बेताब हो उठते हैं। इनकी आवाज दिल को छू लेती है।
राइजिंग मलंग के नाम से हिमाचल की वादियों में कहीं से भी यूट्यूब और फेसबुक पर लाइव होने वाले प्रभजोत प्रभु तथा अमनदीप की जोड़ी ने सूफी संगीत की दुनिया में धूम मचा दी है।
माना जा रहा है कि हिमाचल की वादियों में सूफी गायन का एक नवोदय है। सूफी संगीत के मास्टर इन युवाओं की एक टोली इन दिनों यूट्यूब समेत एफबी और अन्य सोशल साइट्स पर छाई हुई है।
यूं तो सूफी संगीत के माहिर इस बैंड के सदस्य इन दिनों धर्मशाला में डेरा डाले हुए हैं। लेकिन यह बैंड हिमाचल के किसी भी कोने से जब अपने वाद्य यंत्र लेकर लाइव होता है तो इनकी साइट पर लाइक्स और कमेंट्स की भरमार लग जाती है।
अरे मन संभल-संभल पग धरिये से धूम
लीड सिंगर/वोकल प्रभजोत प्रभु और गिटारिस्ट अमन मूलत: पंजाब के लुधियाना से हैं और पश्चिम बंगाल के गुरु मनमोहन सिंह से क्लासिकल संगीत की दीक्षा लेकर आए हैं। दोनों संगीतकार हिमाचल में युवाओं के नए आइकॉन के रूप में उभर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर इस जोड़ी के ..अरे मन संभल-संभल पग धरिए, न जाने रे जोगी न जाने रे तथा न तन न मन न धन अपना जैसे सूफी गाने धूम मचा रहे हैं।
खास बात यह है कि युवाओं की यह टीम वादियों में ऐसी जगह शूट कर रही है, जिससे हिमाचल के भीतर छुपे प्राकृतिक सौंदर्य को भी नई पहचान मिल रही है। इस टीम का यह काम फेसबुक के पेज राइजिंग मलंग पर देखा जा सकता है।
प्रभु का गीत सुन भावुक हुए सचिन
क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के बीते दिनों धर्मशाला प्रवास के दौरान कैंप लुंगटा में सचिन भी प्रभजोत प्रभु की प्रतिभा के कायल हुए बिना नहीं रह सके। प्रभु ने वहां जब अपने अंदाज में हिमाचली धुन छेड़ी तो सचिन भी कुछ पल के लिए भावुक हो गए।
खास बात यह रही है कि इस कार्यक्रम को फेसबुक पर हजारों लोजों ने लाइव देखा। अमर उजाला से बातचीत में प्रभजोत प्रभु ने बताया कि वह हिमाचल में दस वर्षों से रियाज कर रहे हैं।
यहां की आबोहवा संगीत को नई ऊर्जा देती है। उनका मानना है कि संगीत आत्मा की खुराक है और यह खुद को जानने का सबसे बड़ा जरिया भी है। भविष्य की योजना के बारे में प्रभु ने कहा कि वह प्रदेश में बच्चों के लिए संगीत की कक्षाएं शुरू करना चाहते हैं।