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ShraiKoti Mata Temple: मां के इस मंदिर में पति-पत्नी एक साथ नहीं कर सकते दर्शन, हो जाती है ये अनहोनी

Fri, 16 Sep 2022 03:37 PM IST
अरविन्द ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर बुशहर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर बुशहर Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 16 Sep 2022 03:37 PM IST
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सार
श्राईकोटी मंदिर के पास माता को जब ब्रह्मा, विष्णु और शिव ने प्रकट किया तब माता एक कन्या के रूप में प्रकट हुई। उन्होंने श्राईकोटी माता को बताया हमने दैत्य को वरदान दे दिया है, लेकिन समाधान आप करें।
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Shrai Koti Temple custom Rampur Bushahr shimla himachal pradesh
श्राईकोटी माता मंदिर। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के मंदिरों से सदियों पुरानी ऐसी परंपराएं जुड़ी हैं जिन्हें लोग आज भी मानते आ रहे हैं। ऐसा ही एक ऐतिहासिक एंव पौराणिक मंदिर शिमला जिले के रामपुर में 11, 000 फीट की उंचाई पर स्थित है। यह श्री श्राईकोटी माता का मंदिर है। यहां पति और पत्नी मंदिर में एक साथ तो जाते हैं, लेकिन माता की मूर्ति के साथ दर्शन नहीं करते। दोनो में से एक मंदिर के बाहर रहता है जबकि एक माथा टेककर मंदिर से बाहर आएगा तभी दूसरा भीतर जाकर माता का दर्शन करता है।



यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। हालांकि शास्त्रों के अनुसार पूजा अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान  पति-पत्नी के एक साथ करने पर पूर्ण होते हैं, लेकिन यहां ऐसा करने मां नाराज हो जाती है। मान्यता है कि श्राईकोटी मंदिर में माता शैली पुत्री के रूप में विराजमान है। एक साथ माथा टेकने से माता नाराज हो जाती है और दंपती में बिछोड़ा हो जाता है। पांडवों के समय में बने इस मंदिर में आज तक पति पत्नी एक साथ देवी का दर्शन  नहीं करते।


इस अनोखी पंरपरा के बावजूद  मंदिर में हर साल हजारों भक्त मां के दर्शन करने पहुंचते है। मंदिर के मुख्य पुजारी कृष्ण चंद शर्मा  ने बताया दंत कथाओं के अनुसार जब भगवान शिव और देवी पार्वती ने अपने दो बेटों की परीक्षा ली और उन्हें पूरे ब्रह्मांड का चक्कर काटने को कहा तो गणेश ने शिव और पार्वती की परिक्रमा कर तीनों लोकों की परीक्षा जीत ली। कार्तिक पूरे ब्रह्मांड का चक्कर काटने निकले पडे़ जब कार्तिक लौटे तब तक गणेश का विवाह हो गया था।

इसके बाद कार्तिक ने विवाह न करने का प्रण लिया। आज भी श्राईकोटी मंदिर के द्वार पर गणेश अपनी पत्नी के साथ विराजमान हैं। जानकारी के अनुसार श्राईकोटी मंदिर के पास माता को जब ब्रह्मा, विष्णु और शिव ने प्रकट किया तब माता एक कन्या के रूप में प्रकट हुई। उन्होंने श्राईकोटी माता को बताया हमने दैत्य को वरदान दे दिया है, लेकिन समाधान आप करें। हमारी शक्तियां आपके साथ रहेंगी। माता ने अपने शक्ति को परखने के लिए यह स्थान चुना और तीन देवताओं की अराधना करते हुए तपस्या करने लगीं। इस दौरान एक सुमेदा नाम के ऋषि इस स्थान पर पहुंचे ।

उन्होंने माता से पूछा आप यहां क्या कर रही हैं। माता ने जबाव दिया कि मेरे मन में कुछ शंका है  इसलिए  तपस्या कर रही हूं। इसके बाद ऋषि ने माता से कहा कि यह स्थान बहुत सुंदर है। मैं भी आपके साथ इस स्थान पर रहूंगा और वह भी उनके साथ वहां रहने लगे। कई साल बीत जाने के बाद भी सुमेदा ऋषि श्राईकोटी माता को नहीं पहचान पाए। तब माता ऋषि को परखने के लिए एक दिन सुंदर कन्या के रूप में प्रकट हुईं और ऋषि ने अपना संतुलन खो दिया और मन विचलित होने पर हरकतें करने लगा।

तभी माता ने ऋषि को कुत्ता बनने का श्राप दे दिया। माता ने कहा कि यह एक ऐसा पवित्र स्थान है कि यहां तो मैं पति पत्नी को भी एक साथ दर्शन करने नहीं दूंगी। इस प्रथा के अनुसार आज भी पति-पत्नी एक साथ माता का दर्शन नहीं करते। ऋषि को श्राप देने के बाद भी माता के मंदिर के आसपास कुत्ते देखने को मिलते हैं जो हमेशा प्रायश्चित करने के लिए आते हैं।

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