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HP High Court: ग्रेच्युटी पर ब्याज नहीं देने पर सहकारिता विभाग के पंजीयक को कारण बताओ नोटिस जारी
Tue, 10 Jan 2023 09:24 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 10 Jan 2023 09:24 PM IST
सार
प्रदेश हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त सहायक पंजीयक की ग्रेच्युटी पर ब्याज न देने के मामले का कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने सहकारिता विभाग के पंजीयक को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न ब्याज के 4,36,078 रुपये उनसे वसूले जाएं।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त सहायक पंजीयक की ग्रेच्युटी पर ब्याज न देने के मामले का कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने सहकारिता विभाग के पंजीयक को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न ब्याज के 4,36,078 रुपये उनसे वसूले जाएं। कारण बताओ नोटिस का जवाब दायर करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया गया है। साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता को ग्रेच्युटी पर ब्याज के 4,36,078 रुपये अदा करने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने अपने आदेशों की अनुपालना रिपोर्ट चार मार्च को तलब की है।
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खंडपीठ ने सहकारिता विभाग के सचिव को आदेश दिए कि वह चार हफ्ते के भीतर मामले की जांच करे और दोषी अधिकारियों से ब्याज की राशि वसूले, चाहे दोषी अधिकारियों में सहकारिता पंजीयक ही क्यों न हो। याचिकाकर्ता रोशन लाल खजूरिया की याचिका को स्वीकार करते हुए अदालत ने यह आदेश दिए। मामले के अनुसार सहकारिता विभाग ने याचिकाकर्ता को 29 जून 2017 को निलंबित किया था। अगले ही दिन वह सहायक पंजीयक के पद से सेवानिवृत्त हो गया। 18 जुलाई 2017 को विभाग ने उसके खिलाफ आरोपपत्र जारी कर दिया और उसके सारे वित्तीय लाभ रोक दिए।
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याचिकाकर्ता के खिलाफ विभाग ने आरोप लगाया था कि उसने अपने कर्त्तव्य का निर्वहन नहीं किया, जिससे हमीरपुर की बलूट सहकार समिति में करोड़ों रुपयों का घोटाला हुआ। इस आरोप पत्र को याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष चुनौती दी। अदालत ने 30 दिसंबर 2021 को विभाग की ओर से जारी आरोप पत्र को रद्द कर दिया था। 12 मई 2022 को विधि विभाग ने सलाह दी कि हाईकोेर्ट के निर्णय को लागू करना ही उचित है। 26 मई 2022 को विभाग ने याचिकाकर्ता की ग्रेच्युटी अदा कर दी, लेकिन इस पर चार वर्ष का ब्याज देने से इंकार कर दिया।
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अदालत ने पाया कि 5 सितंबर 2022 को सचिव सहकारिता ने पंजीयक सहकारिता को निर्देश दिए थे कि याचिकाकर्ता देरी से दी गई ग्रेच्युटी पर ब्याज का हक रखता है। इसके बावजूद भी पंजीयक ने याचिकाकर्ता को ब्याज देने से इंकार कर दिया। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि नियमानुसार कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने पर सारे वित्तीय लाभ अदा करने पड़ते है। ग्रेच्युटी सिर्फ उन मामलों में रोकी जा सकती है जिनमें विभागीय या अदालती कार्रवाई लंबित हो। अदालत ने पाया कि जिस दिन याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त हुआ, उस दिन न तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई लंबित थी और न ही अदालती। अदालत ने विभाग के 10 अक्तूबर 2022 के निर्णय को निरस्त करते हुए यह आदेश पारित किए।
कचरा प्रबंधन संयंत्र मामले की सुनवाई 28 फरवरी निर्धारित
हिमाचल प्रदेश में ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र स्थापित न करने के मामले में राज्य सरकार हाईकोर्ट में रिपोर्ट दायर नहीं कर पाई। अदालत ने सभी प्रोजेक्ट अधिकारियों को संयुक्त रिपोर्ट दायर करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 28 फरवरी निर्धारित की है।पर्यावरण मानकों के आधार पर ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र स्थापित न करने पर हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट के समक्ष हिमाचल के अलग-अलग हिस्सों से अपशिष्ट प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट स्थापित करने के लिए स्थल विवाद और अनुपचारित सीवरेज और ठोस अपशिष्ट की रिहाई से जुड़ी याचिकाएं दर्ज की गई है। अदालत ने इन मामलों में प्रमुख सचिव (वन), प्रधान सचिव (उद्योग), प्रधान सचिव (कृषि), प्रधान सचिव (जल शक्ति विभाग), प्रधान सचिव (स्वास्थ्य), प्रधान सचिव (ग्रामीण विकास और पंचायती राज) और हिमाचल पथ परिवहन निगम को प्रतिवादी बनाया है।