लॉकडाउन के बीच 55 दिन बाद खुला शिमला का कॉफी हाउस, पीएम मोदी भी हैं इसके मुरीद
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हिमाचल की राजधानी शिमला के मालरोड स्थित ऐतिहासिक इंडियन कॉफी हाउस 55 दिन बाद खोल दिया गया। कोरोना लॉकडाउन के चलते 23 मार्च से कॉफी हाउस बंद था। हालांकि अभी भी कॉफी हाउस के भीतर बैठकर खाने-पीने की इजाजत नहीं है, जिसके चलते ग्राहक मायूस हैं। पार्सल डिलीवरी के चलते यहां लोगों को मिट्टी के कप की जगह डिस्पोजेबल कप में कॉफी दी जा रही है। ग्राहकों को मिट्टी के कप में कॉफी न मिलने से कॉफी पीने का पुराना आनंद नहीं आ रहा।
कॉफी हाउस के प्रबंधक आत्माराम ने बताया कि कॉफी हाउस का गेट खुला होने के बाद बड़ी संख्या में लोग पूछताछ को आ रहे हैं, लेकिन जब उन्हें यह पता चलता है कि भीतर बैठने की इजाजत नहीं है तो मायूस होकर लौट जाते हैं। कॉफी हाउस की खासियत यह है कि यहां आराम से बैठकर लोग कॉफी सहित अन्य खाने-पीने की चीजों का आनंद लेते थे, लेकिन कोरोना के मौजूदा हालात के चलते भीतर बैठकर खाने-पीने की सख्त मनाही है। मंगलवार को भी लोगों ने कॉफी हाउस के सामने बेंच पर और तारघर के समीप रेन शेल्टर में बैठकर कॉफी का आनंद लिया। लोगों ने मांग उठाई की कॉफी हाउस के भीतर सामाजिक दूरी के साथ बैठने की इजाजत हो।
बंगलूरु से आते हैं कॉफी बीनस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यहां की कॉफी के मुरीद हैं। दिसंबर 2017 में जब मोदी शिमला आए थे तो उन्होंने कॉफी हाउस के सामने अपना काफिला रुकवाकर यहां कॉफी की चुस्कियों का आनंद लिया था। तब से आईसीएच की कॉफी मोदी कॉफी के नाम से देश-विदेश में मशहूर हो गई।
इंडियन कॉफी हाउस में कॉफी बनाने के लिए बंगलूरू से कॉफी बीनस आते हैं। यहां इन्हें भूनकर पीसा जाता है। इसके बाद बॉयलर में कॉफी तैयार होती है। टूरिस्ट सीजन में यहां करीब सवा लाख रुपये रोजाना सेल होती है। यहां एक दिन में 700 से 800 कप कॉफी बनाई जाती है।