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Shimla MC Election: इस बार लागू हो सकता है नया रोस्टर, सरकार ने किया नियमों में संशोधन
Sat, 25 Mar 2023 08:41 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 25 Mar 2023 08:41 PM IST
सार
हिमाचल प्रदेश नगर निगम निर्वाचन नियम 2012 में संशोधन किया है। इसके अनुसार इस बार नगर निगम में नया रोस्टर लागू हो सकता है। शहर में कुल 34 वार्ड हैं। इसमें महिलाओं को 50 फीसदी प्रतिनिधित्व देने के लिए 17 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित होना तय हैं।
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शिमला नगर निगम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शिमला नगर निगम चुनाव के लिए आरक्षण रोस्टर जारी होने से ठीक पहले सरकार ने इसके नियमों में बदलाव कर दिया है। शनिवार को इस बारे में शहरी विकास विभाग ने अधिसूचना भी जारी कर दी है। हिमाचल प्रदेश नगर निगम निर्वाचन नियम 2012 में संशोधन किया है। इसके अनुसार इस बार नगर निगम में नया रोस्टर लागू हो सकता है। शहर में कुल 34 वार्ड हैं। इसमें महिलाओं को 50 फीसदी प्रतिनिधित्व देने के लिए 17 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित होना तय हैं। पहले बनाए नियमों के अनुसार जनसंख्या प्रतिशतता के आधार पर रोस्टर लागू किया था।
इसमें जिन वार्डों में महिलाओं की जनसंख्या प्रतिशतता ज्यादा थी वह वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए थे लेकिन इस बार दूसरा फॉर्मूला लागू हो सकता है। इसमें जिन वार्डों में महिलाओं की जनसंख्या प्रतिशतता कम है, उन्हें पहले महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाएगा। इस फार्मूले के लागू होने से शहर में पिछले चुनाव में महिलाओं के लिए आरक्षित वार्ड इस बार अनारक्षित हो सकते हैं। हालांकि, इन पर रोस्टर जारी होने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
आरक्षित वार्डों को लेकर भी नियमों में बदलाव
बीते चुनावों में अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित वार्ड इस बार परिवर्तित हो सकते हैं। इनके परिवर्तन के बाद अगले जिन वार्डों में इन वर्गों की जनसंख्या प्रतिशतता अधिक होगी, वह इनके लिए आरक्षित हो जाएंगे। शहर में कुल 34 में से 7 वार्ड अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है। इनमें से कम से कम तीन वार्ड इन वर्गों की महिलाओं के लिए भी आरक्षित होने हैं।
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बदलाव से पूर्व पार्षदों की बढ़ी धुकधुकी
शहरी विकास सचिव की ओर से नियमों में बदलाव संबंधी अधिसूचना जारी होने के बाद चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे पूर्व पार्षदों की धुकधुकी बढ़ गई है। सभी रोस्टर जारी होने का इंतजार कर रहे है। नियमों में बदलाव से तय माना जा रहा है कि पिछले चुनावों वाला रोस्टर इस बार लागू नहीं होगा, यानि कई पूर्व पार्षद नए रोस्टर के आने से रेस से बाहर हो सकते हैं।
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इसमें जिन वार्डों में महिलाओं की जनसंख्या प्रतिशतता ज्यादा थी वह वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए थे लेकिन इस बार दूसरा फॉर्मूला लागू हो सकता है। इसमें जिन वार्डों में महिलाओं की जनसंख्या प्रतिशतता कम है, उन्हें पहले महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाएगा। इस फार्मूले के लागू होने से शहर में पिछले चुनाव में महिलाओं के लिए आरक्षित वार्ड इस बार अनारक्षित हो सकते हैं। हालांकि, इन पर रोस्टर जारी होने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
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आरक्षित वार्डों को लेकर भी नियमों में बदलाव
बीते चुनावों में अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित वार्ड इस बार परिवर्तित हो सकते हैं। इनके परिवर्तन के बाद अगले जिन वार्डों में इन वर्गों की जनसंख्या प्रतिशतता अधिक होगी, वह इनके लिए आरक्षित हो जाएंगे। शहर में कुल 34 में से 7 वार्ड अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है। इनमें से कम से कम तीन वार्ड इन वर्गों की महिलाओं के लिए भी आरक्षित होने हैं।
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बदलाव से पूर्व पार्षदों की बढ़ी धुकधुकी
शहरी विकास सचिव की ओर से नियमों में बदलाव संबंधी अधिसूचना जारी होने के बाद चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे पूर्व पार्षदों की धुकधुकी बढ़ गई है। सभी रोस्टर जारी होने का इंतजार कर रहे है। नियमों में बदलाव से तय माना जा रहा है कि पिछले चुनावों वाला रोस्टर इस बार लागू नहीं होगा, यानि कई पूर्व पार्षद नए रोस्टर के आने से रेस से बाहर हो सकते हैं।