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हिमाचल: संचार क्रांति के लाने वाले पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री पंडित सुखराम का दिल्ली एम्स में निधन

Wed, 11 May 2022 06:51 PM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो/संवाद, शिमला/मंडी
अमर उजाला ब्यूरो/संवाद, शिमला/मंडी Published by: अनुराग सक्सेना Updated Wed, 11 May 2022 06:51 PM IST
सार

पूर्व केंद्रीय संचार राज्य मंत्री पंडित सुखराम का 95 साल की उम्र में निधन हो गया। साठ साल के सियासी सफर में संचार क्रांति का सूत्रपात कर हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे राज्य की देश भर में पहचान बनाने वाले पंडित सुखराम की मंगलवार रात 1:30 बजे नई दिल्ली एम्स में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई।

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Shimla Former Union Minister Pandit Sukh Ram died was admitted to AIIMS
पंडित सुखराम का निधन - फोटो : अमर उजाला- फाइल फोटो

विस्तार

हिमाचल प्रदेश की राजनीति के चाणक्य एवं संचार क्रांति लाने वाले वाले पूर्व केंद्रीय संचार राज्य मंत्री पंडित सुखराम का 95 साल की उम्र में निधन हो गया। साठ साल के सियासी सफर में संचार क्रांति का सूत्रपात कर हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे राज्य की देश भर में पहचान बनाने वाले पंडित सुखराम की मंगलवार रात 1:30 बजे नई दिल्ली एम्स में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। उनके बेटे पूर्व मंत्री एवं मंडी के विधायक अनिल शर्मा ने बताया कि पंडित सुखराम के पार्थिव शरीर को सड़क मार्ग से दिल्ली से मंडी लाया जाएगा। गुरुवार सुबह 11 बजे सेरी मंच पर उनके अंतिम दर्शन करवाए जाएंगे और उसके बाद राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार मंडी में ब्यास नदी किनारे हनुमानघाट पर होगा। गुरुवार को मंडी बाजार बंद रहेगा। बता दें कि पंडित सुखराम 4 मई से गंभीर थे।

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ब्रेन स्ट्रोक की पुष्टि होने के बाद शनिवार को प्रदेश सरकार के हेलीकाप्टर से उन्हें जोनल अस्पताल मंडी से एम्स दिल्ली के लिए एयरलिफ्ट किया गया था। पंडित सुखराम के निधन पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, सांसद एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने शोक व्यक्त किया। प्रतिभा सिंह ने कहा कि पार्टी सात दिन तक शोक मनाएगी। इस दौरान पार्टी का कोई कार्यक्रम नहीं होगा। पंडित सुखराम का जन्म 27 जुलाई, 1927 को मंडी जिला के इलाका तुंगल स्थित कोटली गांव में पं. भवदेव के घर हुआ था। उनकी शिक्षा मंडी के विजय हाई स्कूल के पश्चात वल्लभ कालेज और लॉ कालेज दिल्ली से हुई। वह पांच बार विधानसभा और तीन बार लोकसभा के लिए मंडी संसदीय सीट से चुने गए। कई बुलंदियां छूने के साथ-साथ वह भ्रष्टाचार के कई ओरोपों से भी घिरे रहे। सुखराम 1993 से 1996 तक केंद्रीय संचार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहे थे। 1996 में एक कंपनी को ठेका देने के बदले तीन लाख रुपये घूस लेने के आरोप में उन्हें तिहाड़ जेल भी भेजा गया।
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पंडित सुखराम हमारे सहयोगी रहे हैं। उनके निधन की खबर से स्तब्ध हूं। -जेपी नड्डा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भाजपा

पंडित सुखराम दूरदर्शी नेता थे, जिन्हें देश में दूरसंचार क्रांति के लिए स्मरण किया जाएगा। उनके निधन से देश ने विशेष रूप से हिमाचल ने सदैव नए विचार देने वाला एक वरिष्ठ नेता खो दिया है।- जयराम ठाकुर, मुख्यमंत्री
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1998 में पंडित सुखराम ने विकास के लिए भाजपा को समर्थन देकर गठबंधन सरकार बनाने व चलाने में मदद की थी। इससे प्रदेश में अविस्मरणीय विकास हुआ था। -प्रेम कुमार धूमल, पूर्व मुख्यमंत्री
  
पंडित सुखराम का निधन देश के लिए एक बड़ी क्षति है। भगवान दिवंगत आत्मा को शांति दें और उनके परिवार को इस कठिन घड़ी में साहस दें। -प्रतिभा सिंह, सांसद एवं कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष


राज्यपाल ने सुखराम के निधन पर जताया शोक

राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम के निधन पर शोक जताया है। राज्यपाल ने अपने शोक संदेश में कहा कि पंडित सुखराम का दूरसंचार क्षेत्र को विस्तार देने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वह एक वरिष्ठ नेता थे, जिनका हिमाचल की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान था। प्रदेश के विकास में बहुमूल्य योगदान दिया, जिसे प्रदेशवासी सदैव याद रखेंगे। राज्यपाल ने शोक संतप्त परिवार के सदस्यों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।

अंतिम संस्कार में नहीं आएंगे सलमान खान 
अनिल शर्मा ने कहा कि सलमान खान अंतिम संस्कार में नहीं आएंगे। बाद में मंडी में शोक जताने पहुंच सकते हैं। उनकी बहू अर्पिता खान हेलीकाप्टर से वीरवार सुबह मंडी पहुंच रही हैं। वह विदेश में है। उने  बेटे आयुष बुधवार देर शाम मंडी पहुंचे।


पंडित सुखराम का राजनीतिक सफर
पंडित सुखराम 1962 में विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए और 1967, 1972, 1974 (उप चुनाव), 1977, 1982, 1998 और 2003 में दोबारा चुने गए। वह 1967-72, 1980-85 और 24 मार्च, 1998 से 7 मई, 1998 तक राज्य मंत्रिमंडल में ऊर्जा, लोक निर्माण विभाग, कृषि, बागवानी, पशुपालन, सिंचाई इत्यादि विभागों के मंत्री रहे। वह मंडी संसदीय क्षेत्र से 1985, 1991 और 1996 में लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए और विभिन्न विभागों में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया।

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