Shimla: चमियाना में बिना ऑपरेशन पैन्क्रियाटाइटिस का सफल इलाज, मरीज को अस्पताल से मिली छुट्टी
चमियाना सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शिमला में पहली बार बिना ऑपरेशन उन्नत तकनीक से अग्नाशयशोथ (पैन्क्रियाटाइटिस) से पीड़ित दो मरीजों का सफल इलाज किया गया है।
विस्तार
अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशलिटी (चमियाना सुपर स्पेशलिटी अस्पताल) शिमला में पहली बार बिना ऑपरेशन उन्नत तकनीक से अग्नाशयशोथ (पैन्क्रियाटाइटिस) से पीड़ित दो मरीजों का सफल इलाज किया गया है। इसे प्रदेश में सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। चमियाना अस्पताल के गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग की टीम ने एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (ईयूएस) की मदद से मरीजों के पेट में जमा संक्रमित द्रव को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला। इस प्रक्रिया में पेट चीरकर सर्जरी करने की जरूरत नहीं पड़ी। इलाज के बाद दोनों मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो गए हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशलिटी (चमियाना सुपर स्पेशलिटी अस्पताल) शिमला में पहली बार बिना ऑपरेशन उन्नत तकनीक से अग्नाशयशोथ (पैन्क्रियाटाइटिस) से पीड़ित दो मरीजों का सफल इलाज किया गया है। इसे प्रदेश में सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। चमियाना अस्पताल के गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग की टीम ने एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (ईयूएस) की मदद से मरीजों के पेट में जमा संक्रमित द्रव को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला। इस प्रक्रिया में पेट चीरकर सर्जरी करने की जरूरत नहीं पड़ी। इलाज के बाद दोनों मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो गए हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
उन्होंने बताया कि यह तकनीक एंडोस्कोपी और अल्ट्रासाउंड का संयुक्त रूप है। इसमें बिना चीर-फाड़ के एंडोस्कोपी अल्ट्रासाउंड मशीन से इलाज किया जाता है। इससे डॉक्टर पेट के अंदर जमा द्रव तक सुरक्षित रास्ता बना पाते हैं। इससे बड़े ऑपरेशन से बचाव होता है, दर्द कम होता है और मरीज जल्दी ठीक हो जाता है। उन्होंने यह तकनीक शुरू करने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार जताया।
अब प्रदेश से बाहर नहीं जाना पड़ेगा
अब तक प्रदेश में इस सुविधा के अभाव में ऐसे मरीजों को इलाज के लिए बाहर के बड़े अस्पतालों में जाना पड़ता था। चमियाना अस्पताल में यह सुविधा शुरू होने से अब मरीजों को कम खर्च में, बिना ऑपरेशन और जल्दी इलाज यहीं मिल सकेगा।
विभाग में कोलेंजियोस्कोपी प्रक्रियाएं शुरू
गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग में हाल ही में कोलेंजियोस्कोपी सुविधा भी शुरू की गई है। इसके जरिए पित्त नलिकाओं की बड़ी पथरी को एंडोस्कोपी से तोड़कर निकाला जा सकता है। जरूरत पड़ने पर बायोप्सी भी ली जा सकती है। अस्पताल में यह उन्नत इलाज नियमित रूप से शुरू किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यह सभी सुविधाएं नवीनतम मशीनों और तकनीकों से संभव हो पाई हैं। इससे प्रदेश के मरीजों को बेहतर और आधुनिक इलाज घर के पास ही मिल सकेगा।
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