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Shimla News: यूजीसी नियम के समर्थन में उतरी अब एसएफआई

Wed, 28 Jan 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jan 2026 11:59 PM IST
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SFI now comes out in support of UGC rule
भेदभाव समाप्त करने में करेगा सहयोग : सेक्टा
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जातिगत भेदभाव की शिकायतों में 118 प्रतिशत की वृद्धि
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की राज्य कमेटी ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए लाए गए यूजीसी नियम 2026 का स्वागत किया है।
एसएफआई नेताओं ने इसे वर्षों के छात्र और सामाजिक संघर्ष का परिणाम बताया। संगठन के राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर और राज्य सचिव सन्नी सेक्टा ने कहा कि यह नियम समानता तथा सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, लेकिन इसे अंतिम समाधान नहीं माना जा सकता। एसएफआई ने स्पष्ट किया कि यह नियम शोध छात्र रोहित वेमुला की संस्थागत मृत्यु के बाद विश्वविद्यालयों में व्याप्त जातिगत भेदभाव को लेकर उठे सवालों और न्यायिक हस्तक्षेप की पृष्ठभूमि में सामने आया है। संगठन का कहना है कि नियम के शीर्षक में रोहित वेमुला का नाम शामिल होना चाहिए। अनिल ठाकुर ने कहा कि रोहित अधिनियम की मांग वर्षों से की जा रही है और यूजीसी नियम उसी संघर्ष का आंशिक परिणाम है।
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सन्नी सेक्टा ने ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बीते कुछ वर्षों में जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतों में 118 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों में संकाय स्तर पर अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व लगातार घटा है जो पहले 14 प्रतिशत के आसपास था और अब लगभग 6 प्रतिशत रह गया है। यह स्थिति उच्च शिक्षा संस्थानों में गहरे संरचनात्मक भेदभाव को उजागर करती है। एसएफआई ने समान अवसर प्रकोष्ठ और अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि इन निकायों की स्वायत्तता की कमी और प्रशासनिक दबाव के कारण शिकायतों का निष्पक्ष निपटारा नहीं हो पा रहा है।
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संगठन ने मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन से स्वतंत्र एक बाहरी वैधानिक समिति का गठन हो जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग का बहुमत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा सामाजिक बहिष्कार, अलगाव और आत्महत्या के लिए उकसाने जैसे कृत्यों के लिए स्पष्ट आपराधिक प्रावधान हों। एसएफआई ने मांग की कि यूजीसी की सलाहकार व्यवस्था से परे जांच अधिकारों वाला एक राष्ट्रीय निगरानी आयोग गठित किया जाए।
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