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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Section 118 Investigation by Himachal govt vigilance department on Ex Minister Unofficial Note

धारा 118 में अवैध वसूली मामले में नया मोड़, इस पूर्व मंत्री के यूओ नोट पर भी बैठी जांच

Thu, 20 Sep 2018 11:18 AM IST
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 20 Sep 2018 11:18 AM IST
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Section 118 Investigation by Himachal govt vigilance department on Ex Minister Unofficial Note

कसौली में हिमाचल से बाहर के व्यवसायी को रिजॉर्ट के लिए धारा 118 में जमीन खरीद की अनुमति देने को कथित अवैध वसूली करने के मामले की जांच में नया मोड़ आ गया है। अब स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने इस बारे में पूर्व मंत्री के कुछ अनऑफिशियल (यूओ) नोट पर भी जांच बैठा दी है। ये यूओ नोट हिमाचल प्रदेश मुजारियत एवं भू सुधार अधिनियम की धारा-118 की मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए जारी किए गए। 

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दरअसल पूर्व मुख्य सचिव और तत्कालीन प्रधान सचिव राजस्व पी. मित्रा से दो दिन पहले हुई पूछताछ के बाद ही यह तफ्तीश एक अन्य दिशा में मुड़ गई है। सूत्र बताते हैं कि विवादित जमीन आवंटित करने के लिए एक तत्कालीन मंत्री ने कई बार यूओ नोट जारी किए।
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इनमें दो यूओ नोट की विषयवस्तु और इन्हें जारी करने की मंशा की छानबीन शुरू की गई है। कसौली के चेल्सी-ए-रिजॉर्ट के लिए धारा-118 के तहत जमीन देने को वर्ष 2005-06 में भी राज्य सरकार से मंजूरी मांगी गई थी, मगर यह मामला रद्द कर दिया गया। वर्ष 2009-10 में दोबारा मंजूरी मांगी गई।

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कस सकता है गण्यमान्य लोगों पर शिकंजा

Section 118 Investigation by Himachal govt vigilance department on Ex Minister Unofficial Note

तत्कालीन सरकार के एक मंत्री ने इस मंजूरी के लिए यूओ नोट जारी किया। इसके बाद मामला वित्तायुक्त राजस्व के पास पहुंचा। इस पर सीधे मंजूरी देने के बजाय वित्तायुक्त राजस्व ने कसौली में कैरिंग कै पेसिटी पर रिपोर्ट के लिए डीसी को चिट्ठी लिखी। मामला उलझा रहा तो मंत्री का दूसरा यूओ नोट आ गया।

उस समय प्रधान सचिव राजस्व पी मित्रा ही थे। इस यूओ नोट के बाद प्रधान सचिव ने फाइल आगे मंत्री को ही भेज दी। फिर सरकार की मंजूरी आने के बाद धारा -118 की यह मंजूरी दी गई। 

इसी मामले में संबंधित व्यवसायी ने पी मित्रा से फोन पर बात की। इस बातचीत को राज्य सरकार की खुफिया एजेंसी ने एक अन्य मामले की छानबीन के दौरान रिकॉर्ड कर दिया। यह बातचीत सीडी के रूप में है।

इसी सीडी को अवैध लेनदेन की जांच आगे बढ़ाने को आधार बनाया गया है। अब यूओ नोट इसके सहयोगी दस्तावेज बन गए हैं। आने वाले दिनों में विजिलेंस ब्यूरो इससे संबंधित कई अन्य तथ्य एकत्र कर कुछ अन्य गण्यमान्य लोगों पर शिकंजा कस सकता है।

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