धारा 118 : पुराने साक्ष्य ही बढ़ा रहे मित्रा की नई मुसीबत
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धारा 118 के तहत गैर कृषक को जमीन खरीदने की मंजूरी देने में भ्रष्टाचार के कथित मामले में फंसे राज्य चुनाव आयुक्त पार्थ सारथी मित्रा की मुश्किलें पुराने ही साक्ष्य बढ़ा रहे हैं। साल 2011 में विजिलेंस के पास यह सभी तथ्य आ गए थे, जिनकी बदौलत वर्तमान में विजिलेंस उन पर शिकंजा कसती जा रही है।
चाहे कॉल रिकार्डिंग हो या फिर परिस्थिति जन्य साक्ष्य, सभी उस समय जांच अधिकारी के पास थे, लेकिन किन्हीं कारणों उन्हें दरकिनार कर दिया गया। हालांकि, सरकार के रिकार्ड में दर्ज वही साक्ष्य ही अब मित्रा की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। विजिलेंस सूत्रों की मानें तो साल 2010-11 में जब ब्यूरो ने मामला दर्ज कर छानबीन की तो उस दौरान ही एक कॉल रिकार्डिंग हाथ लग गई थी।
इससे पहली बार तत्कालीन प्रधान सचिव राजस्व एवं वर्तमान राज्य चुनाव आयुक्त मित्रा का नाम सामने आया था। उस समय भी मित्रा से पूछताछ की गई, लेकिन रिकार्डिंग के तथ्यों को नजरंदाज कर दिया गया। इसी वजह से उस समय मित्रा पहले गृह सचिव और बाद में वीरभद्र सरकार के दौरान मुख्य सचिव तक बन गए, लेकिन अब नई सरकार के
दौरान कोर्ट से क्लोजर रिपोर्ट खारिज होने के बाद ब्यूरो की नए सिरे से शुरू हुई जांच में वही पुराने तथ्य मित्रा की नई मुसीबत बन गए हैं। सूत्रों का कहना है कि ब्यूरो को अगर सरकार से मित्रा को बतौर आरोपी पूछताछ और अन्य कार्रवाई करने की मंजूरी मिली तो गिरफ्तारी तक के लिए भी ब्यूरो को मंजूरी नहीं लेनी होगी।