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स्क्रब टायफस : बुखार हैै तो तुरंत करवाएं चेकअप
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आईजीएमसी के चिकित्सकों ने किया सतर्क, कीड़े के काटने से शरीर में काला दाग पड़ना भी हो सकता है स्क्रब टायफस
नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में तुरंत चेकअ करवाने की दी सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। बरसात के मौसम में कीड़े के काटने से अगर शरीर में काला दाग बन जाए तो तुरंत अस्पताल में आकर चेकअप करवाएं। यह स्क्रब टायफस भी हो सकता है।
इसके अलावा किसी भी मरीज को अंदरूनी बुखार हो तो वह समय पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में उपचार करवाएं। इस बीमारी की पहचान में कुछ दिन का समय लग जाता है। ऐसे में समस्या बढ़ सकती है। आईजीएमसी के मेडिसिन विभाग के सहायक प्रो. डॉ. उष्येंद्र शर्मा ने बताया कि स्क्रब टायफस दिमाग, फेफड़े, ह्रदय, लिवर और किडनी को प्रभावित करता है। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में स्क्रब टायफस के लक्षणों को लेकर सैकड़ों मरीज रोजाना उपचार करवाने आ रहे हैं। अस्पताल में वीरवार को भी पांच मरीजों के सैंपल जांच के लिए भेजे थे हालांकि सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई। लिहाजा पार्क आदि जहां पर घास होती है, वहां पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। अस्पताल में वीरवार को 150 से अधिक मरीजों ने मेडिसिन ओपीडी में उपचार करवाया।
स्क्रब टायफस के लक्षण
तेज बुखार 104 से 105 तक आ सकता है।
जोड़ों में दर्द और कंपकंपी के साथ बुखार आना
शरीर में ऐंठन अकड़न या शरीर टूटा हुआ लगना
अधिक संक्रमण से गर्दन, बाजू के नीचे कूल्हों के ऊपर गिल्टियां आती हैं
बचाव के उपाय
शरीर में सफाई का रखें ध्यान
घर और आसपास के वातावरण को साफ रखें
घर के चारों ओर घास, खरपतवार नहीं उगने दें
घर और आसपास कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें
तीन में से दो को मिली छुट्टी
आईजीएमसी के मेडिसिन वार्ड में स्क्रब टायफस के तीन मरीज दाखिल हैं। लेकिन वीरवार को स्वास्थ्य में सुधार के बाद दो मरीजों को घर भेज दिया है। एक जो मरीज दाखिल है, वह भी स्वस्थ है।
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नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में तुरंत चेकअ करवाने की दी सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। बरसात के मौसम में कीड़े के काटने से अगर शरीर में काला दाग बन जाए तो तुरंत अस्पताल में आकर चेकअप करवाएं। यह स्क्रब टायफस भी हो सकता है।
इसके अलावा किसी भी मरीज को अंदरूनी बुखार हो तो वह समय पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में उपचार करवाएं। इस बीमारी की पहचान में कुछ दिन का समय लग जाता है। ऐसे में समस्या बढ़ सकती है। आईजीएमसी के मेडिसिन विभाग के सहायक प्रो. डॉ. उष्येंद्र शर्मा ने बताया कि स्क्रब टायफस दिमाग, फेफड़े, ह्रदय, लिवर और किडनी को प्रभावित करता है। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में स्क्रब टायफस के लक्षणों को लेकर सैकड़ों मरीज रोजाना उपचार करवाने आ रहे हैं। अस्पताल में वीरवार को भी पांच मरीजों के सैंपल जांच के लिए भेजे थे हालांकि सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई। लिहाजा पार्क आदि जहां पर घास होती है, वहां पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। अस्पताल में वीरवार को 150 से अधिक मरीजों ने मेडिसिन ओपीडी में उपचार करवाया।
स्क्रब टायफस के लक्षण
तेज बुखार 104 से 105 तक आ सकता है।
जोड़ों में दर्द और कंपकंपी के साथ बुखार आना
शरीर में ऐंठन अकड़न या शरीर टूटा हुआ लगना
अधिक संक्रमण से गर्दन, बाजू के नीचे कूल्हों के ऊपर गिल्टियां आती हैं
बचाव के उपाय
शरीर में सफाई का रखें ध्यान
घर और आसपास के वातावरण को साफ रखें
घर के चारों ओर घास, खरपतवार नहीं उगने दें
घर और आसपास कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें
तीन में से दो को मिली छुट्टी
आईजीएमसी के मेडिसिन वार्ड में स्क्रब टायफस के तीन मरीज दाखिल हैं। लेकिन वीरवार को स्वास्थ्य में सुधार के बाद दो मरीजों को घर भेज दिया है। एक जो मरीज दाखिल है, वह भी स्वस्थ है।
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