फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   scrub typhus cases continue increasing in himachal

स्क्रब टायफस का कहर, एक बेड पर दो-दो मरीज किए जा रहे भर्ती

Mon, 11 Sep 2017 12:35 PM IST
सुमित ठाकुर/अमर उजाला, शिमला
सुमित ठाकुर/अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 11 Sep 2017 12:35 PM IST
विज्ञापन
scrub typhus cases continue increasing in himachal

प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान आईजीएमसी में स्क्रब टायफस के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। स्क्रब टायफस के प्रकोप से पीड़ित करीब नौ मरीज अस्पताल में दाखिल हैं। पांच मरीज मेल मेडिसन और चार महिला वार्ड में दाखिल हैं। 

विज्ञापन


स्थिति यह है कि अस्पताल में दाखिल स्क्रब टायफस मरीजों को बेड भी शेयर करना पड़ रहा है। यानी की एक बेड पर दो-दो मरीज भर्ती किए गए हैं। मेडिसन वार्ड में हालत ज्यादा खराब है। अस्पताल में इन दिनों एक बेड पर दो-दो मरीजों को भर्ती किया गया है। 
विज्ञापन


मरीज विरोध भी कर रहे हैं लेकिन अस्पताल प्रबंधन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। आर्थो वार्ड में भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति है। बता दें कि आईजीएमसी में रोजाना औसतन तीन हजार से अधिक की ओपीडी होती है। 857 बिस्तर वाले अस्पताल में रोजाना 70 से 80 मरीजों को दाखिल किया जा रहा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


जब मरीज वार्डों में पहुंचते है तो मरीजों को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्पताल प्रबंधन को इस तरह की शिकायतें मिल चुकी हैं लेकिन अभी तक हल नहीं निकाला जा सका है। दूसरी ओर एक ओर परेशानी यह भी है कि डॉक्टर मरीजों को चार बजे के बाद डिस्चार्ज कर रहे हैं। डॉक्टरों की यह लापरवाही भी भारी पड़ रही है। 

बढ़ रही मरीजों की संख्या : राहुल राव
अस्पताल के चिकित्सा उप अधीक्षक डॉ. राहुल रॉव ने कहा कि डिस्चार्ज मरीज के बेड न छोड़ने के कारण यह दिक्कत आ रही है। दूसरी ओर मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। समस्या के समाधान को प्रयास किए जा रहे हैं।

इन विभागों की हालत है सबसे खराब
मेडिसन और आर्थो वार्ड की हालत सबसे ज्यादा खराब है। अस्पताल में सबसे ज्यादा डबलिंग इन्हीं दो विभागों में होती है। आए दिनों वार्ड में इस तरह की समस्या आम दिखती है। लेकिन न तो यूनिट हेड और न ही विभागाध्यक्ष इस समस्या का समाधान कर पाए हैं। हालांकि दूसरी ओर देखा जाए तो सर्जरी विभाग इन सभी विभागों से अलग है। मरीजों के दाखिले के अलावा यहां पर डिस्चार्ज करने की पूरी प्रक्रिया सिस्टमेटिक तरीके से पूरी की जाती है।

आखिर क्यों होती है डबलिंग, जानिए एक वज

scrub typhus cases continue increasing in himachal

अस्पताल में सुबह के समय विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष और डॉक्टर वार्ड में राउंड करते हैं। यहां पर दाखिल मरीज और डिस्चार्ज होने वाले मरीज की पूरी जानकारी डॉक्टरों का रहती है। डॉक्टर अपने जूनियर डॉक्टरों को इस बारे में नहीं समझाते हैं।

क्योंकि राउंड के बाद मरीजों को डिस्चार्ज करने का जिम्मा इन्हीं डॉक्टरों के हवाले रहता है। पीजी डॉक्टर मरीजों कीे चार बजे या उससे बाद डिस्चार्ज स्लिप तैयार करते हैं। ऐसे में दूर दराज के मरीजों की बसों की आवाजाही न होने के कारण वे बेड नहीं छोड़ते। ऐसे में अन्य मरीज आता है तो वह उसके साथ ही रहते हैं। आपत्ति करते है तो कहा जाता है कि बस सुविधा नहीं है, एक रात ठहरना ही पड़ेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed