वैज्ञानिक का दावा, अधूरे हैं न्यूटन और आर्कमडिज के सिद्धांत
- मेरे शोध को वैज्ञानिक सम्मेलन बुलाकर परखे सरकार: अजय शर्मा
- अपने शोध पर उठने वाले हर सवाल का आधार सहित दूंगा जवाब
- शोध सही पाए जाने पर विज्ञान में गुरु बनेगा भारत
- न्यूटन और आर्कमडिज के सिद्धांतों की उजागर की है खामियां
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वैज्ञानिक और शिक्षा विभाग में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत अजय शर्मा ने प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार से मांग की है कि उनके द्वारा महान वैज्ञानिकों न्यूटन और आर्कमडिज के सिद्धांतों पर शोध कर उजागर की गई खामियों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों को बुलाकर सम्मेलन करवाएं ताकि उनके शोध को पूरी दुनिया मान सके।
दावा किया कि वे अपने शोध से जुड़े हर सवाल का जवाब देकर उसे साबित करेंगे कि न्यूटन और आर्कमडिज के सिद्धांत अधूरे हैं। जिसे अधूरा ही पढ़ा और पढ़ाया जा रहा है। उनका विश्वास है कि यदि इसमें उनके शोध सही पाए गए तो विज्ञान में भारत विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर होगा।
शिमला में पत्रकारों से बातचीत करते हुए शर्मा ने कहा कि 34 सालों में यह शोध किए हैं। विदेशों के नामी वैज्ञानिकों ने उन्हें जांचा परखा और बाकायदा इंटरनेशनल जनरल में प्रकाशित भी हुए हैं। अब जरूरत है कि उनके अपने देश की सरकार इसे परखे और विश्व स्तर पर इसे पहचान दिलवाए। एनसीईआरटी की किताबों में अधूरे सिद्धांत ही पढ़ाए जा रहे हैं।
यह हैं अजय शर्मा के शोध
वैज्ञानिक अजय शर्मा का दावा है कि न्यूटन का गति का दूसरा नियम f=ma न्यूटन ने दिया ही नहीं। प्रिंसिपिया के पृष्ठ 19-20 में दिया न्यूटन का यह दूसरा नियम न्यूटन का नहीं है। इसे स्विटजरलैंड के वैज्ञानिक लियोन हार्ड यूलर ने दिया था, जो न्यूटन की मृत्यु के 48 साल बाद 1775 में दिया गया था।
वैज्ञानिक न्यूटन का गति का तीसरा नियम अधूरा है। हर क्रिया के विपरीत और समान प्रतिक्रिया होती है, नियम भी अधूरा है। वस्तु की प्रतिक्रिया उसकी प्रकृति और संरचना पर भी निर्भर करती है। उनका इस पर किया शोध और नियम वस्तु की प्रकृति और संरचना की व्याख्या करता है।
वस्तु पानी में गिरती है तो उसका भार कम होता है: आर्कमडिज सिद्धांत
शर्मा के मुताबिक एक जैसे भार की स्टील की पत्ती और स्टील का गोल पानी में फेंके तो वह एक समान समय में समान दूरी तय नहीं करता। जबकि सिद्धांत के मुताबिक ये बराबर समय में बराबर दूरी तय करती हैं। इसमें वस्तु के आकार की व्याख्या नहीं की गई है।
अजय शर्मा को 95 बार अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में शोध पत्र पढ़ने का न्योता मिला। इंग्लैंड, जर्मनी, रूस और अमेरिका में उन्होंने शोध पढ़े भी। 55 रिसर्च पेपर अमेरिका, यूरोप की वैज्ञानिक रिक्मोंडेशन के बाद जर्नल में प्रकाशित भी हुए।
शर्मा की इन्हीं शोध पर दो किताबें बियोंड न्यूटन एंड आर्कमडिज और बियोंड आइनस्टाइन एंड e=mc प्रकाशित हो चुकी है। अजय शर्मा और उनकी पत्नी अंजना शर्मा ने सरकार से शोध को साबित करने को मंच प्रदान करने की मांग की है।