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शिमला में नन्हें छात्रों से स्कूल में बेरहमी, पीठ पर लाद दी भारी भरकम बोरियां

Sat, 06 Aug 2016 03:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 06 Aug 2016 03:20 PM IST
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School Students become labourer in chalaunthi school shimla.
पढ़ाई के लिए स्कूल पहुंचे नन्हें छात्रों के साथ बेरहमी की तस्वीरें सामने आई हैं। - फोटो : अमर उजाला

पढ़ाई के लिए स्कूल पहुंचे नन्हें छात्रों के साथ बेरहमी की तस्वीरें सामने आई हैं। मामला शिमला का है यहां छात्रों को बोरियां उठाने को मजबूर होना पड़ा। शिमला शहर के चलौंठी स्कूल के छात्र शुक्रवार को मजदूरी करने को मजबूर कर दिए गए।

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छात्रों को करीब एक किमी दूर संजौली भेज दिया गया। यहां बच्चों को दी जाने वाली मुफ्त वर्दी की खेप पहुंची थी। स्कूल के स्टाफ ने शिक्षा विभाग के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए इन बच्चों की पीठ पर वर्दी से भरी बोरियां लाद दीं।
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भारी बारिश और ट्रैफिक के बीच बोरियों के भार के नीचे दबे छात्र अनियंत्रित होकर सड़क में इधर से उधर धक्के खा रहे थे। स्कूल में पढ़ाई के लिए आए छात्रों की पीठ पर बोरियां लदी देखकर हर कोई हैरान रह गया। बारिश के बीच भीगते हुए छात्र हालांकि किसी तरह बोरियों के साथ स्कूल पहुंच गए।

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खराब मौसम के बीच बच्चों से करवाया काम

School Students become labourer in chalaunthi school shimla.
खराब मौसम के बीच बच्चे संजौली पहुंचे। - फोटो : अमर उजाला

राज्य सरकार की ओर सख्त निर्देश हैं कि स्कूलों में बच्चों से किसी तरह का काम नहीं करवाया जाएगा, लेकिन चलौंठी स्कूल ने सरकार के निर्देशों को दरकिनार करते हुए संजौली से वर्दी के बोरे लाने के लिए छात्रों को भेज दिया। बच्चों के साथ एक शिक्षक और चतुर्थ श्रेणी कर्मी को भी भेजा गया।

खराब मौसम के बीच बच्चे संजौली पहुंचे। यहां पहले से ही बोरियों में वर्दी का कपड़ा भरा पड़ा था। यहां पहुंचते ही छात्रों की पीठ पर बोरियां लाद दी गई और वापस स्कूल जाने के लिए कहा। वापसी के समय बोझ के कारण छात्रों का कदम बढ़ाना भी मुश्किल हो रहा था।

रास्ते में भारी ट्रैफिक, धक्के खा रहे थे छात्र

School Students become labourer in chalaunthi school shimla.
करीब एक किलोमीटर का सफर छात्रों ने इन बोरियों के बोझ के साथ किसी तरह पूरा किया। - फोटो : अमर उजाला

करीब एक किलोमीटर का सफर छात्रों ने इन बोरियों के बोझ के साथ किसी तरह पूरा किया। आठ से दस वर्ष की उम्र के बच्चों की स्कूल पहुंचते-पहुंचते सांस चढ़ चुकी थी और बारिश के बीच इनके पसीने छूट चुक थे।

लेकिन स्कूल प्रशासन को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। हैरानी इस बात की भी थी कि चतुर्थ श्रेणी कर्मी अपने हाथ में हल्का सामान लेकर बच्चों के साथ चल रही थी। चलौंठी से संजौली तक भारी ट्रैफिक रहती है। बोरियों का बोझ उठाना छात्रों के मुश्किल हो रहा था।

छात्रों के कदम कभी इधर तो कभी उधर जा रहे थे। ऐसे में कोई हादसा भी हो सकता था। बावजूद स्कूल प्रशासन अनहोनी के बारे में सोचा तक नहीं और छात्रों को संजौली भेज दिया गया।

बच्चों की पीठ पर बोरियां खुद हल्का सामान उठा चल रही थी चतुर्थ श्रेणी कर्मी

School Students become labourer in chalaunthi school shimla.
बच्चों को वर्दी खराब न होने देने की हिदायतें भी बराबर दे रही थी। - फोटो : अमर उजाला

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष समाज सेवी रवि कुमार का कहना है कि  बोरियां भारी थी। बच्चों के लिए इन्हें उठाना आसान नहीं था। उनके साथ भेजी गई चतुर्थ श्रेणी कर्मी महिला अपने आप हल्का सामान हाथ में उठाकर साथ चल रही थी।

बच्चों को वर्दी खराब न होने देने की हिदायतें भी बराबर दे रही थी। रवि कुमार का कहना है कि इस तरह बच्चों से काम करवाना नियमों की अनदेखी है। स्कूल प्रशासन  को चाहिए था कि वह मजदूर को लगाकर वर्दी स्कूल पहुंचाता। स्कूल प्रशासन से जवाब तलब किया जाना चाहिए।

मामले की जानकारी नहीं, कार्रवाई करेंगे
बीआरसी हरीश शर्मा का कहना है कि उन्हें छात्रों से वर्दी की बोरियां उठवाए जाने की जानकारी नहीं है, और न ही कोई शिकायत मिली है। यदि ऐसा हुआ है, तो संबंधित मुख्य अध्यापक से जवाब मांगा जाएगा। इस मामले की जांच की जाएगी।

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