ये कैसे गुरुजी, बच्चों से दो किमी तक ढुलाया मिड-डे मील का राशन
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हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के चुराह उपमंडल की एक माध्यमिक पाठशाला में शिक्षा ग्रहण करने के लिए पहुंच रहे बच्चों से मजदूरों की तरह काम लिया गया। स्कूल प्रशासन ने नन्हें हाथों में किताबों की जगह पर मिड-डे मील के राशन की बोरी थमा दी।
ऐसे में इन बच्चों को राशन की बोरी दो किलोमीटर दूर स्थित राशन डीपो से उठाकर स्कूल परिसर में पहुंचानी पड़ी। यह हाल तब है जब राशन ढुलाई के लिए अलग से बजट का प्रावधान होता है। यह मामला चुराह क्षेत्र के तहत एक माध्यमिक पाठशाला का है।
हेडमास्टर बोले- जानकारी नहीं
बताया जा रहा है कि जिले में कई स्कूल ऐसे हैं, जहां पर बच्चों से मिड-डे मील के राशन की ढुलाई करवाई जाती है। उधर, भरी गर्मी में सामान ढुलाई जैसी गतिविधियों में बच्चों से काम लेने की सूचनाओं से अभिभावक भी चिंतित हैं। विद्यालय के हेडमास्टर सुरेंद्र मोहन का कहना है कि विद्यालय में दो मिड डे मील वर्कर तैनात हैं।
इसके बावजूद बच्चों को राशन लाने के लिए भेजे जाने की उन्हें जानकारी नहीं है। वहीं, बीईईओ (ब्लॉक एलिमेंट्री एजुकेशन ऑफिसर) शेर सिंह ने बताया कि स्कूलों में राशन ढुलाई के लिए अलग से बजट का प्रावधान होता है। यदि बच्चों से राशन ढुलाई कराने जैसी कोई बात हुई है तो मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।