ये क्या! फर्जी लिस्ट पर ही बना डाली कॉलोनी
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शहरी गरीबों को सपनों का घर देने के लिए चल रही केंद्र सरकार की एक योजना पर हिमाचल में बड़ी लापरवाही सामने आई है।
एकीकृत हाऊसिंग एंड स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईएचएसडीपी) के तहत नालागढ़ नगर परिषद ने 126 पात्र गरीब परिवारों का चयन किया और इनके लिए हिमुडा से फ्लैट बनवाए। जब घर बनकर तैयार हुए तो 114 परिवार मीसिंग पाए गए।
इस सूची में केवल 12 परिवार ही मिले हैं और इन्हें घर अलाट कर दिए गए है। शेष खाली पड़े हैं। अब सवाल यह है कि क्या फर्जी लाभार्थियों की सूची पर ही फ्लैट बना दिए गए?
क्या है यह योजना
इस योजना के तहत उन शहरों के अर्बन पूअर लोगों को छत दी जाती है, जो जेएनएनयूआरएम के दायरे में नहीं आते।
नगर परिषद को अपने सदन से लाभार्थी बीपीएल परिवारों का चयन कर स्कीम फंडिंग के लिए शहरी विकास मंत्रालय को भेजनी होती है। नालागढ़ नगर परिषद ने भी 228 परिवारों का चयन किया।
पहले चरण में करीब 5 करोड़ की लागत से 126 परिवारों के लिए फ्लैट निर्माण कार्य शुरू किया। लेकिन घर बनने के बाद पात्र परिवार नहीं मिले।
अब तर्क दिया जा रहा है कि प्रवासी परिवारों का चयन होने से यह चूक हुई। इसी स्कीम में परवाणू नगर परिषद ने 1.28 करोड़ से फ्लैट बनाए हैं और अब तक 36 परिवारों को अलॉट कर दिए हैं।
शिमला में पैसा खत्म, घर बने नहीं
शहरी विकास मंत्रालय ने शिमला शहर के 384 गरीब परिवारों के लिए घर बनाकर देने के लिए 14 करोड़ का प्रोजेक्ट मंजूर किया। हिमुडा ने 14 करोड़ में से 11 करोड़ खर्च कर केवल 176 लोगों के लिए ही घर बनाए। 208 परिवार फिर रह गए।
शहरी विकास विभाग का कहना है कि प्रोजेक्ट हिमुडा के बजाय निजी क्षेत्र में दिया होता तो ज्यादा घर बन जाने थे।
हिमाचल सरकार के शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने बताया कि नालागढ़ नगर परिषद से पूछा गया है कि पहले बनी सूची किसने और कैसे बनाई थी? पात्र परिवारों का चयन नए सिरे से करने को कहा है।
नगर परिषद सूची बनाकर शहरी विकास विभाग को भेजेगी और वहां फैसला होगा। चुनाव के बाद ऐसी सभी स्कीमों की समीक्षा की जाएगी।