संयुक्त कर्मचारी महासंघ: हिमाचल सरकार दो माह में करे लंबित डीए और एरियर का भुगतान
संयुक्त कर्मचारी महासंघ ने प्रदेश सरकार से कर्मचारियों का लंबित डीए और एरियर दो माह के भीतर जारी करने की मांग उठाई है।
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हिमाचल प्रदेश संयुक्त कर्मचारी महासंघ ने प्रदेश सरकार से कर्मचारियों का लंबित डीए और एरियर दो माह के भीतर जारी करने की मांग उठाई है। रविवार को शिमला में हुई महासंघ की आम सभा में इस बाबत प्रस्ताव पास किया गया। आमसभा में सचिवालय सेवाएं कर्मचारी महासंघ को समर्थन का एलान किया गया और मुख्यमंत्री से कर्मचारियों के साथ बातचीत की अपील की गई। संयुक्त कर्मचारी महासंघ ने सचिवालय कर्मियों के साथ खड़े रहने की घोषणा की। सरकार और कर्मचारियों के बीच गतिरोध खत्म करने की पहल करने की मांग उठाई। आयोजन में प्रदेश के 50 कर्मचारी संगठनों के सैकड़ों प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
आम सभा की अध्यक्षता महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने की। इस मौके पर विभिन्न सरकारी विभागों के अलावा बोर्डों, निगमों, नगर निगम, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की। आम सभा में नरेश शर्मा, आशा कुमार, रविंदर शर्मा, राज कुमार शर्मा, अरुण गुलेरिया, केपी शर्मा, बलदेव ठाकुर, समर चौहान, तिलक नायक, मनोज शर्मा, डीपी शर्मा, कुलदीप अत्री, एनपीएसईए के 9 जिला अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर, सुनील जरयाल, राजिंदर कुमार, अशोक कुमार, राकेश धीमान, विरेंद्र जिंटू सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।
वीरेंद्र चौहान अध्यक्ष, हीरालाल महासचिव चुने
आम सभा में हिमाचल प्रदेश संयुक्त कर्मचारी महासंघ के त्रिवार्षिक चुनाव भी हुए। चुनाव अधिकारी गोविंद चतरांटा और अरुण गुलेरिया की अध्यक्षता में नई कार्यकारिणी का चयन किया गया। इसमें वीरेंद्र चौहान को अध्यक्ष, हीरालाल वर्मा को महासचिव, खेमेंद्र गुप्ता को वित्त सचिव, विनोद कुमार और वनीता सकलानी को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, मानसिंह ठाकुर को उपाध्यक्ष चुना गया। कार्यकारिणी विस्तार का अधिकार अध्यक्ष एवं महासचिव को दिया गया है।
आम सहमति से प्रस्ताव पास कर उठाई यह मांगें
- 9200 करोड़ की एनपीएस राशि केंद्र से वापस ले प्रदेश सरकार
- प्रदेश सरकार एचआरटीसी को दे रोडवेज का दर्जा
- बिजली बोर्ड, नगर निगम और पंचायती राज में पुरानी पेंशन बहाल की जाए
- 4-9-14 टाइम स्केल को बहाल किया जाए
- अनुबंध कर्मचारियों को साल में दो बार नियमित किया जाए
- अनुबंध नीति को समाप्त कर नियमित भर्तियां की जाएं
- आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित किया जाए
- वेतन भत्तों हो संशोधित
- ट्रांसफर पालिसी को 30 के स्थान पर 20 किलोमीटर लागू हो