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चुनावी साल में सांसदों को आई आदर्श ग्रामों की याद, मांगी जिलों से रिपोर्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Updated Mon, 15 Oct 2018 12:36 PM IST
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मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव बीके अग्रवाल ने उन उपायुक्तों से रिपोर्ट तलब की है।
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चुनावी साल आने के साथ ही सूबे के उन आदर्श गांवों की तकदीर बदलने की आस जग गई है, जिन्हें चार साल पहले मोदी सरकार के गठन के बाद सांसद आदर्श ग्राम योजना में सांसदों ने गोद लिया था।
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योजना का उद्देश्य तो यह था कि अगले पांच साल के अंदर उस ग्राम पंचायत को हर सुविधा से लैस किया जाए ताकि आसपास की ग्राम पंचायतों के लिए वह आदर्श बन सकें। लेकिन केंद्र और प्रदेश में रही कांग्रेस सरकार की सियासी खींचतान के चलते ग्राम आदर्श नहीं बन सके।
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सूबे में नई भाजपा सरकार आने के बाद और चुनावी हलचल शुरू होते ही प्रदेश सरकार ने गांवों को आदर्श गांव बनाने की कवायद शुरू कर दी है। इसके तहत मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव बीके अग्रवाल ने उन उपायुक्तों से रिपोर्ट तलब की है जिनके जिलों में सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत आने वाली ग्राम पंचायतें हैं।
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यही नहीं, इस महीने के आखिरी सप्ताह में इस संबंध में समीक्षा बैठक भी होने तैयारी है। सूत्रों की मानें तो सांसदों ने मुख्यमंत्री से मिलकर आदर्श ग्रामों को लेकर अफसरों की उदासीनता की शिकायत की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव स्तर से यह हलचल शुरू हुई है।
जाहिर है, लोकसभा चुनाव की दस्तक के साथ ही सरकार केंद्र की हर उस योजना को जमीन पर उतारने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है जिसकी वजह से मोदी सरकार की इमेज बन भी सकती है और बिगड़ भी सकती है।
सांसद आदर्श ग्राम योजना भी ऐसी ही योजना है। योजना शुरू होते समय कांग्रेस सांसदों ने इसको लेकर खासा विरोध किया था, ऐसे में सरकार इस बात को लेकर भी सतर्क है कि उस गांवों की खस्ता हालत चुनावी मुद्दा न बन जाए।