यहां घर बनाना, मतलब जान को खतरा
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जिला आपदा प्राधिकरण ने संजौली को सिंकिंग जोन में रखा है। जान माल की सुरक्षा के मद्देनजर आपदा प्राधिकरण ने यहां भवन निर्माण पर अपनी सहमति नहीं दी है। इसमें खतरा बताया गया है। बावजूद इसके यहां भवन निर्माण जोरों पर है।
एमसी धड़ल्ले से मकानों के नक्शे पास कर रहा है। आपदा प्राधिकरण का दावा है कि संजौली में कार्यशाला के माध्यम से लोगों को आने वाले खतरे से आगाह किया है लेकिन लोग जमीन छोड़ने को तैयार नहीं है।
निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है। सोमवार को जहां मलबा गिरा है वह जगह भी सिकिंग जोन में है। सोमवार को सत्संग भवन संजौली के पास एक निर्माणाधीन भवन में काम कर रहे मजदूरों पर अचानक मलबा गिर गया था।
इसमें पांच मजदूर और दो बच्चे दब गए। डेढ़ साल की बच्ची सुनैना की मलबे में दबने से मौत हो गई थी। यह काम कर रहे मजदूर सुनील की बेटी थी।
बचाई जा सकती थी मासूम की जान
पोस्टमार्टम कर सुनैना का शव पुलिस ने सुबह उसके पिता सुनील को सौंप दिया। मां अभी दाखिल है। पुष्टि वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश ने की है।
ठेकेदार और मुंशी को पुलिस ने मंगलवार को संजौली चौकी में पूछताछ के लिए तलब किया। घटनास्थल पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। जब मलबा गिरा तो उसे हटाने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंच गए। उस जगह को तत्काल कवर नहीं किया गया। इस स्थिति में आपाधापी का माहौल हो गया।
क्रमबद्ध तरीके से राहत कार्य होता तो शायद बच्ची की जान बच जाती। एएसपी (सिटी) भजन देव नेगी ने कहा कि मामले की जांच चल रही है।
जिला आपदा प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नीरज कुमार ने कहा कि जिस जगह हादसा हुआ वह सिंकिंग जोन में है, वहां भवन निर्माण खतरे से खाली नहीं।
कई बार कार्यशाला में लोगों को जागरूक किया और आग्रह किया कि इन जगहों पर भवन निर्माण न करें लेकिन कोई मानने को तैयार नहीं।