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Sanjauli Mosque Case: संजौली मस्जिद का पूरा ढांचा गिराने के आदेश, कोर्ट ने निचली दो मंजिलों को भी अवैध बताया

Sat, 03 May 2025 09:20 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 03 May 2025 09:20 PM IST
सार

शिमला  नगर निगम आयुक्त कोर्ट ने शनिवार को इस मामले पर अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए मस्जिद की निचली दो मंजिलें भी अवैध घोषित कर दीं। साथ ही इन्हें गिराने के आदेश भी जारी कर दिए हैं।

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Sanjauli Mosque illegal construction demolition case Big decision in mcc court shimla
संजौली मस्जिद अवैध करार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली में बनाई गई मस्जिद की नीचे की दोनों मंजिलों को भी नगर निगम आयुक्त कोर्ट ने अवैध करार दे दिया है। कोर्ट ने शनिवार को इस मामले पर अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए नीचे की दोनों मंजिलों को भी गिराने के आदेश दिए। इससे पहले ऊपर की तीन मंजिलों को कोर्ट 5 अक्तूबर, 2024 को अवैध करार देकर गिराने के आदेश दे चुका था। कोर्ट के आदेश के बाद मस्जिद कमेटी ने ऊपर की दो मंजिलों को गिरा भी दिया है। इस तरह अब पांचों मंजिलों को अवैध करार देते हुए कोर्ट ने पूरी तरह गिराने के आदेश जारी कर दिए हैं। शनिवार को सुनवाई के दौरान वक्फ बोर्ड निचली दो मंजिलों के निर्माण की मंजूरी, नक्शा और राजस्व रिकॉर्ड पेश नहीं कर पाया। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 8 मई तक इस मामले की सुनवाई पूरी करने के आयुक्त कोर्ट को आदेश दिए थे, जिसके चलते आयुक्त कोर्ट ने शनिवार को अपना अंतिम फैसला सुना दिया है।

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कोर्ट में फैसले को चुनौती दी जाएगी
उधर, वक्फ बोर्ड ने आयुक्त कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देने का फैसला लिया है। बोर्ड का कहना है कि फैसले की कॉपी आने पर इसे वक्फ बोर्ड के सीईओ जफर इकबाल के सामने रखा जाएगा। इसके बाद सक्षम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। बोर्ड ने दावा किया कि निचली दो मंजिलें देश की आजादी से भी पुरानी हैं। इनकी जगह ही मस्जिद का निर्माण किया गया है। हालांकि, पर्याप्त समय देने के बावजूद मस्जिद की निचली मंजिलों के निर्माण की मंजूरी, नक्शा और जमीन के मालिकाना हक का राजस्व रिकॉर्ड पेश न होने पर कोर्ट ने इन्हें भी अवैध करार दे दिया। कितने समय में ये मंजिलें तोड़ी जानी हैं, इस पर फैसले की कॉपी आने पर ही स्थिति स्पष्ट होगी।

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50 मिनट तक चली बहस
कोर्ट में दोपहर करीब 12:00 बजे इस मामले पर बहस शुरू हुई। आयुक्त ने बोर्ड से राजस्व रिकॉर्ड, नक्शा और निर्माण की मंजूरी दिखाने को कहा। बोर्ड के अधिवक्ता ने कहा कि रिकॉर्ड अभी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि 1947 से पहले मस्जिद बनी है। इसकी जगह ही वर्तमान मस्जिद बनाई गई है। आयुक्त ने पूछा कि जब 2010 में पुरानी मस्जिद तोड़ी गई, फिर नई मस्जिद बनाने के लिए किससे अनुमति ली। रेजीडेंट सोसायटी ने कहा कि नए निर्माण के लिए नगर निगम से मंजूरी ली जानी चाहिए थी। नक्शा पास करवाना तो दूर, मस्जिद कमेटी ने नगर निगम से टैक्स और कूड़े की भी एनओसी नहीं ली। करीब 12:50 बजे बहस पूरी होने के बाद आयुक्त ने फैसला सुरक्षित रख लिया। दोपहर 1:25 बजे जब दोबारा सुनवाई शुरू हुई तो कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।

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इस फैसले को चुनौती देंगे : कुतुबदीन
वक्फ बोर्ड के संपदा अधिकारी कुतुबदीन मान ने कहा कि आयुक्त कोर्ट के फैसले को सक्षम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। राजस्व रिकॉर्ड में गैर मुमकिन मस्जिद दर्ज है। हालांकि, अभी रिकाॅर्ड अपडेट न होने के कारण हम कोर्ट में इसे पेश नहीं कर पाए। अगले हफ्ते फैसले की कॉपी मिलने पर इसे बोर्ड के सीईओ के सामने रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि ऊपर की तीन मंजिलें अवैध थीं, जिन्हें हमने और मस्जिद कमेटी ने भी कोर्ट के आदेश पर तोड़ दिया है।


 

दो गुटों के झगड़े से शुरू हुआ विवाद मस्जिद गिराने तक पहुंचा
राजधानी के मल्याणा में दो गुटों के बीच हुआ झगड़ा संजौली मस्जिद के चर्चा में आने और इसके गिराने का बड़ा कारण बना था। संजौली मस्जिद में अवैध निर्माण का मामला साल 2010 से चल रहा था। कई नोटिस जारी होने के बावजूद मस्जिद कमेटी ने पांच मंजिला भवन तैयार कर लिया। आयुक्त कोर्ट में भी करीब 14 साल तक लगातार इस मामले पर सिर्फ सुनवाई होती रही। इसी बीच 29 अगस्त 2024 को शहर के मल्याणा में दो गुटों के बीच झगड़ा हो गया। इसमें मल्याणा के एक युवक को गंभीर चोटें लगीं। आरोप था कि हमलावर आरोपी मल्याणा से भागकर संजौली की इस मस्जिद में जाकर छिप गए थे। मामला पुलिस तक पहुंचा और केस दर्ज हुआ। गुस्साए मल्याणा, भट्ठाकुफर, सांगटी, संजौली के लोगों ने एक सितंबर को संजौली मस्जिद के बाहर पहुंचकर धरना दे दिया। इसमें कांग्रेस के कई पार्षद और भाजपा पदाधिकारी भी शामिल थे। धरने के बाद ही मस्जिद के अवैध होने की बात भी आम जनता के सामने आ गई। पांच सितंबर को इस मामले पर आयुक्त कोर्ट में भी सुनवाई हुई लेकिन फैसला टल गया। इसी बीच हिंदू संगठनों ने संजौली बाजार में 11 सितंबर को उग्र प्रदर्शन कर दिया। प्रदर्शन रोकने के लिए पुलिस को कई लोगों पर लाठीचार्ज करना पड़ा। कई लोगों पर केस भी दर्ज हुए। लोगों की मांग थी कि यदि मस्जिद अवैध है तो इसे तुरंत तोड़ा जाए।

हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला, फैसले के आदेश
हिंदू संगठनों के उग्र प्रदर्शन के बाद नगर निगम पर इस मामले में फैसला लेने का दबाव बढ़ा। कई लोगों ने हाईकोर्ट में भी याचिका दायर कर ली। उधर पांच अक्तूबर को आयुक्त कोर्ट ने इस मस्जिद की ऊपरी तीन मंजिलों को अवैध माना और इन्हें गिराने के आदेश दिए। वहीं शहर के साथ प्रदेश भर में गरमाए इस मामले के बीच मस्जिद कमेटी ने भी आदेश मानने का फैसला लिया। अवैध निर्माण गिराने का काम शुरू कर दिया। हालांकि, दो महीने में गिराया जाने वाला अवैध निर्माण सात महीने बाद भी पूरा नहीं हुआ। कोर्ट ने तीन मई तक इसे गिराने के आदेश दिए थे। अब निचली दो मंजिलों को भी गिराने के आदेश दिए हैं। अब मस्जिद की जमीन को लेकर भी विवाद छिड़ गया है। दावा किया जा रहा है कि मस्जिद की जमीन सरकार के नाम है और इस पर वक्फ बोर्ड ने कब्जा कर रखा है।

चार केस हुए, थाने के चक्कर काटे, अब मिला न्याय : पार्षद
संजौली मस्जिद के अवैध निर्माण को लेकर प्रदर्शन करने पर भाजपा पार्षद कमलेश मेहता पर चार केस दर्ज किए गए। पार्षद को कई बार पुलिस थाने में आकर पूछताछ में शामिल होना पड़ा। फैसला आने के बाद पार्षद ने कहा कि यह न्याय की जीत हुई है। कोर्ट के फैसले से स्पष्ट है कि उनका प्रदर्शन सही था। मस्जिद अवैध रूप से बनी थी और अब इसे पूरी तरह से गिराने के आदेश जारी होना ऐतिहासिक फैसला है।

प्रदर्शन किए, डंडे खाए, आज मिला इंसाफ
सरकार की जमीन पर अवैध रूप से बनाई गई इस मस्जिद को गिराने के लिए शहरभर में प्रदर्शन हुआ। कई लोगों पर केस हुए और कुछ ने तो पुलिस के डंडे भी खाए। लेकिन आज उन्हें इंसाफ मिल गया है। आयुक्त कोर्ट से लेकर प्रदेश हाईकोर्ट तक इस मस्जिद को गिराने का मामला उठाने वाली संजौली की रेजीडेंट सोसायटी ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया। सोसायटी के अधिवक्ता जगत पाल ने कहा कि हम पहले दिन से कह रहे थे कि यह मस्जिद अवैध है। इसका निर्माण सरकारी जमीन पर हुआ है। अब आयुक्त कोर्ट ने भी इसे अवैध करार दे दिया है। निचली दो मंजिलें भी अब गिरानी होंगी। आयुक्त कोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि यह मस्जिद जिस जमीन पर बनी है, वह जमीन सरकार की है। यह पूरा अवैध निर्माण किया गया था।

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