स्वच्छता अभियान की खुली पोल,फर्जी आंकड़े दिखा स्वच्छता में अव्वल बना ये जिला
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स्वच्छता अभियान के नाम पर फर्जी आंकड़े दिखाकर हिमाचल का ये जिला प्रदेश का नंबर वन जिला बन गया है। इससे स्वच्छता अभियान की पोल खुल गई है। स्वच्छता अभियान के नाम पर फर्जी आंकड़े दिखाकर जिला शिमला प्रदेश का नंबर वन जिला बन गया है।
डीडीडब्ल्यूएस वेबसाइट पर जिला प्रशासन ने शौचालय संबंधित जो आंकड़े दिखाए हैं, उन पर विश्वास करना मुश्किल है। वेबसाइट पर जिला शिमला के 10 विकास खंडों के आंकड़े है उसमें कुछ में उलटफेर है।
अमर उजाला की टीम ने डीडीडब्ल्यूएस के आंकड़ों और जिलेभर के उन लोगों के नाम क्रॉस चेक किए। इसमें सामने आया कि वेबसाइट पर जिन लोगों के पास शौचालय हैं दिखाया है, असल में उन लोगों के पास तो शौचालय हैं ही नहीं। इसमें गड़बड़झाला होने की पूरी आशंका है। जिला प्रशासन इस पूरे मामले में जांच बिठाने का दावा कर रहा है।
जिला प्रशासन ने 2 अक्तूबर तक बाह्य शौच मुक्त का लक्ष्य रखा था। लेकिन जिला प्रशासन की टीम ने इससे कई पहले लक्ष्य को हासिल कर शिमला को बाह्य शौच मुक्त जिला की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया। इसमें जिले को केंद्रीय आवासीय एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्री वैंकेया नायडू ने खुला शौच मुक्त पर सम्मानित भी किया।
सर्वेक्षण में भी घालमेल
2012 में शौचालय को लेकर सर्वेक्षण किया गया था। इसमें उन परिवारों को शामिल किया गया जिनके पास शौचालय नहीं थे। सर्वेक्षण में कुछ परिवारों के नाम दर्ज नहीं किए गए जिनके पास शौचालय नहीं था। ऐसे में सर्वेक्षण पर भी सवाल उठ रहे हैं।
मामले पर डीसी रोहन चंद ठाकुर से तीखे सवाल
सवाल : डीडीडब्ल्यूएस वेबसाइट के आंकड़ों में लोगों के शौचालय बने दिखाए गए हैं। हकीकत में कई परिवारों के पास शौचालय आज भी नहीं है। क्या कहेंगे?
डीसी : अगर ऐसा हुआ है तो उसकी वेरिफिकेशन की जाएगी। मामले में गड़बड़ पाई गई तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की जाएगी।
सवाल : 2012 में जो सर्वेक्षण हुआ उसमें कैसे खामियां रह गई। किसने किया सर्वेक्षण?
जवाब : 2012 का सर्वेक्षण पंचायत प्रतिनिधि और कर्मचारियों ने किया था। सर्वेक्षण में प्रधान ने बतौर काउंटर साइन भी किए थे।
सवाल : क्या बचे हुए लोगों केे शौचालय बनेंगे?
जवाब : जिन लोगों के शौचालय नहीं बने हैं उनके मामले को केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।