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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rules changed: Govt companies will also set up medium power projects in Himachal

नियम बदले: सरकारी कंपनियां भी हिमाचल में लगाएंगी मध्यम बिजली प्रोजेक्ट

Wed, 05 Mar 2025 11:12 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 05 Mar 2025 11:12 AM IST
सार

प्रदेश में अब बाहरी राज्य और केंद्रीय उपक्रम भी बिजली उत्पादन कर सकेंगे। बीते कई वर्षों से आवंटित नहीं हो रहीं 20 परियोजनाओं के लिए सरकार ने नियमों में संशोधन किया है।

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Rules changed: Govt companies will also set up medium power projects in Himachal
बिजली उत्पादन( सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में अब बाहरी राज्य और केंद्रीय उपक्रम भी बिजली उत्पादन कर सकेंगे। बीते कई वर्षों से आवंटित नहीं हो रहीं 20 परियोजनाओं के लिए सरकार ने नियमों में संशोधन किया है। बिजली उत्पादन करने के लिए बाहरी राज्यों और केंद्रीय उपक्रमों को न्योता देने के लिए पत्र जारी किए गए हैं। ऊर्जा निदेशालय ने 308 मेगावाट की 20 बिजली परियोजनाओं के आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अन्य राज्यों, केंद्रीय उपक्रमों को 10 लाख प्रति मेगावाट अपफ्रंट प्रीमियम के आधार पर प्रोजेक्ट दिए जाएंगे। 40 वर्ष के लिए आवंटित की जाने वाली इन परियोजनाओं की अवधि पूरी हाेने के बाद इन पर सरकार का पूरा नियंत्रण होगा।

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5.8 मेगावाट से लेकर 63.6 मेगावाट की यह परियोजनाएं कुल्लू, चंबा, किन्नौर, लाहौल-स्पीति और शिमला जिलों में चिह्नित की गई हैं। चिनाव, सतलुज, रावी और ब्यास नदी बेसिन में इन परियोजनाओं को लगाना प्रस्तावित है। प्रदेश सरकार ने पहली बार इन परियोजनाओं को अन्य राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों व केंद्रीय उपक्रमों को 10 लाख प्रति मेगावाट अपफ्रंट प्रीमियम के आधार पर 40 वर्ष के लिए आवंटित करने का निर्णय लिया है। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में सभी राज्यों के ऊर्जा सचिवों व केंद्रीय उपक्रमों को पत्र भेजा गया है।

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इन परियोजनाओं के आवंटन के लिए अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार के लिए विज्ञापन भी जारी किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के लगने से बिजली की आपूर्ति, मुफ्त बिजली के रूप में राजस्व में बढ़ोतरी, स्थानीय लोगों को रोजगार व स्थानीय क्षेत्रों का विकास सुनिश्चित होगा। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि छोटे निवेशक इन परियोजनाओं में निवेश नहीं कर रहे हैं। इसके चलते अब अन्य राज्यों व केंद्रीय उपक्रमों को बुलाने का फैसला लिया गया है। बिजली परियोजनाएं स्थापित करने के लिए निवेशकों को सिंगल विंडो की तर्ज पर सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी।

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