आरक्षण पर फिर बोले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत आरक्षण पर दिए अपने विवादित बयान पर अटल हैं। बिहार चुनाव में विरोधी भले ही भागवत के बयान को मुद्दा बना रहे हों लेकिन कुल्लू में उन्होंने फिर दोहराया कि आरक्षण जाति नहीं बल्कि आर्थिक आधार पर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे अगर किसी को आपत्ति है तो होती रहे।
उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर का हवाला देते हुए कहा कि हर दस साल में आरक्षण की समीक्षा होनी चाहिए थी लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। आरक्षण पर एक बार चर्चा जरूरी है। उन्होंने ये भी कहा कि आरक्षण देना संघ नहीं सरकार का काम है। नीति बनाना और सरकार को चलाने का रिमोट कंट्रोल हमारे हाथ में नहीं है।
श्रीमद्भागवत गीता बने राष्ट्रीय ग्रंथ
देवभूमि में चार दिन के प्रवास पर पहुंचे भागवत के सामने देव समाज की बैठक में श्रीमद्भागवत गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने का मुद्दा भी उठा। पुजारी संघ के जिला अध्यक्ष इंद्र देव शास्त्री ने कहा कि गीता केवल कोर्ट में कसम खाने तक सीमित रह गई है। इसे राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किया जाना चाहिए।
इस पर आरएसएस प्रमुख ने आश्वासन दिया कि इस मसले पर पहले मंथन किया जाएगा, उसके बाद ही यह निर्णय लिया जाएगा कि इसे कहां और किस स्तर पर उठाया जाना चाहिए। बैठक में पशुबलि पर रोक का मामला भी गूंजा। भागवत ने कहा कि धर्म के संरक्षण के लिए समरसता आवश्यक है।
सबको मिले मंदिर में प्रवेश का एक द्वार : भागवत
देव संस्कृति और परंपरा से जुड़े किसी भी मुद्दे पर कोई भी फैसला लेने से पहले सबकी राय लेनी चाहिए। फैसला थोपना सही नहीं है। परंपरा बदली भी जा सकती है लेकिन इससे जुड़े लोगों की राय लेना आवश्यक है। भागवत ने कहा कि देव संस्कृति को बचाने के लिए सबको एक नजर से देखना होगा। सभी हिंदू हैं। जात-पात का कोई फर्क नहीं है। हिंदू राष्ट्र निर्माण को देव संस्कृति के संरक्षण के लिए समरसता आवश्यक है।
बैठक में देव समाज के करीब 200 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि समाज यदि एकमत होकर चलेगा तो इससे सामाजिक एकता को बल मिलेगा। सबको मंदिर में प्रवेश पाने का अधिकार हो तथा अंतिम संस्कार के लिए समान श्मशान स्थल की व्यवस्था हो, समाज के अंतिम व्यक्ति तक समरसता की अनुभूति हो इस ओर सबके प्रयास रहने चाहिए।
आपस में संवाद बढ़ाएं धार्मिक संगठन
उन्होंने सामाजिक धार्मिक संगठनों को आपस में संवाद बढ़ाकर मिलकर प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा विचार तो एकात्मता का है, लेकिन यह हमारे आचरण में भी आना चाहिए, इसी में इसकी सार्थकता है। डॉ. मोहन भागवत कुल्लू के देव सदन में कुल्लू जिला के देव प्रतिनिधियों, कारदार, पुजारी तथा गुरों के सम्मेलन में संबोधित कर रहे थे।
इस कार्यक्रम में कुल्लू जिला के लगभग 200 देव प्रतिनिधियों ने भाग लिया। देव प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देव संस्कृति ही हिंदू संस्कृति है। जब देव संस्कृति प्रभावी थी तब विश्व में कोई युद्ध नहीं थे। पर्यावरण भी शुद्ध था हमने अपनी संस्कृति को छोड़ा इसलिए समस्याएं भी बढ़ी हमारी संस्कृति तो मानवता की भलाई के लिए काम करती है।
बच्चों को अपनी संस्कृति का ज्ञान और गौरव बताएं
इसमें कट्टरता के लिए कोई स्थान नहीं है। परिवार व्यवस्था में क्षरण और पारिवारिक मूल्यों में आ रही गिरावट पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि परिवार व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रत्येक परिवार को सप्ताह में एक बार सामूहिक भोजन पर खुलकर चर्चा करनी चाहिए।
बच्चों को अपनी संस्कृति का ज्ञान और गौरव बताएंगे तो वह कभी भटकेंगे नहीं और देश के अच्छे नागरिक बनेंगे। सत्संग सभा के अध्यक्ष राकेश कोहली ने सबका आभार जताया। इस अवसर पर संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ. मनमोहन वैद्य उत्तर क्षेत्र कार्यवाह सीताराम व्यास, प्रांत संघचालक कर्नल रूप चंद, सह प्रांत संघचालक डॉ. वीर सिंह रांगडा, जिला संघचालक राजीव करीर भी उपस्थित थे।
आरक्षण पर भागवत और पार्टी एक: शांता
भाजपा के वरिष्ठ नेता शांता कुमार ने धर्मशाला में प्रेस वार्ता के दौरान आरक्षण पर दिए बयान पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत ने कभी नहीं कहा कि आरक्षण को खत्म कर दो। उन्होंने सिर्फ इतना कहा था कि आरक्षण पर पुनर्विचार होना चाहिए।
आरक्षण पर भागवत ने जो कहा वही भाजपा ने कहा। दोनों के शब्दों में अंतर हो सकता है, लेकिन भाव एक ही है। शांता कुमार ने कहा कि एससी, एसटी वर्ग में आरक्षण का फायदा सिर्फ क्रीमिलेयर को मिल पाया है। एससी, एसटी के गरीब तबके को इसका फायदा नहीं मिला है। आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार 60 करोड़ लोग एक हजार रुपये महीना पर गुजार कर रहे हैं।
11 करोड़ लोग भुखमरी की हालत में
11 करोड़ लोग भुखमरी की हालत में है। ये लोग अनुसूचित जाति और जनजाति के हैं। अनुसूचित जाति और जनजाति के 83 फीसदी लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिला। ऐसे में इस पर पुनर्विचार जरूरी है। आरक्षण में अंत्योदय योजना को भी शामिल किया जाना चाहिए। भाजपा आरक्षण को बदलना नहीं सिर्फ न्यायसंगत बनाना चाहती है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष उनके बयान पर लोगों को भ्रमित कर रहा है। उन्होंने कहा कि वह खुद इस मामले को पार्टी के भीतर उठाकर इसकी वकालत करेंगे। उन्होंने कहा कि अधिकतर पंचायतें पूर्ण स्वच्छ नहीं है, लेकिन झूठे कागजों से उन्होंने निर्मलता के प्रमाणपत्र ले लिए हैं। अगर मेरा वश चलता तो शौचालय न बनाने वाले परिवारों का राशन कार्ड जब्त कर लेता।