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कांगड़ा में शांता-धूमल गुट फिर आमने-सामने, गर्माई सियासत

Fri, 13 Sep 2019 01:16 PM IST
अरविन्द ठाकुर सुनील चड्ढा, अमर उजाला, धर्मशाला
सुनील चड्ढा, अमर उजाला, धर्मशाला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 13 Sep 2019 01:16 PM IST
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Rival groups led by Prem Kumar Dhumal and Shanta Kumar in Kangra Himachal Pradesh
फाइल फोटो

हिमाचल भाजपा के दो मजबूत सियासी स्तंभों के बीच 20 वर्ष पहले शुरू हुआ शीत युद्ध धर्मशाला उपचुनाव से ठीक पहले एक बार फिर तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार के नाम सोशल मीडिया में जारी पत्र बम सियासी दुर्ग में फटने को तैयार है। मामले में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के करीबी पूर्व मंत्री रविंद्र रवि का नाम आने के बाद दोनों गुटों में सोशल मीडिया और अंदरखाते गुटबाजी तेज हो गई है।

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पालमपुर संगठनात्मक जिला अध्यक्ष विनय शर्मा ने दो दिन पहले प्रेस वार्ता बुलाकर पत्र बम जारी करने को बिना नाम लिए सीधे धूमल गुट पर हमला कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि अपनी ही पार्टी के लोगों ने पत्र बम जारी कर सरकार की छवि धूमिल करने की कोशिश की है। इससे पहले शांता कुमार ने सार्वजनिक रूप से आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार खुले रूप से सियासी युद्ध में कूद गए। हालांकि, पत्र बम में कथित भ्रष्टाचार के आरोप सह रहे उद्योग मंत्री बिक्रम ठाकुर ने अभी तक चुप्पी साधे रखी है।
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पुख्ता सूत्रों की मानें तो इस बार शांता कुमार भी आरपार की लड़ाई के मूड में हैं चूंकि पहली बार सीधे उन पर हमला किया गया है। दोनों गुटों में सोशल मीडिया पर सियासी युद्ध तेज हो गया है। सूत्रों की मानें तो शांता गुट के हमले के बाद आगे की रणनीति के लिए रविंद्र रवि ने भी हमीरपुर का रुख कर लिया है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं उपचुनाव से पहले शांता और धूमल गुटों में छिड़ी जंग काफी तेज होने वाली है जो मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है।

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Rival groups led by Prem Kumar Dhumal and Shanta Kumar in Kangra Himachal Pradesh
फाइल फोटो

उल्लेखनीय है कि एक माह पहले कांगड़ा के नेताओं इंदु गोस्वामी, विपिन परमार, रमेश धवाला और पवन राणा के बीच राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते सियासी जंग सियासी चौखट पर थी। मुख्यमंत्री के कई प्रयासों के बाद इस सियासी युद्ध की धार उपचुनाव तक कुंद हुई थी। 

मुनीश की एंट्री से कांगड़ा के कई नेता नाराज, पठानिया ने मुश्किल से थामा है गुबार 
मुख्यमंत्री के कांगड़ा दौरे के दौरान कांगड़ा के व्यवसायी मुनीश शर्मा की भाजपा में एंट्री से स्थानीय नेता नाराज हो गए थे। नाराजगी इसलिए है कि मुनीश ने कांग्रेस के पूर्व विधायक सुरेंद्र काकू की एंट्री करवाकर पूरे कांगड़ा को हाईजेक करने की कोशिश की है। विधायक राकेश पठानिया पहले से ही मंत्री न बनने से नाराज हैं। ऐसे में उपचुनाव से पहले मुख्यमंत्री के समक्ष कांगड़ा में गुटबाजी से पार पाना बड़ी चुनौती बन गई है। 

नकारात्मक गतिविधियों पर जल्द लगना चाहिए विराम : शर्मा
राजनीतिक विश्लेषक एवं पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त हिमाचल केसी शर्मा ने कहा कि कांगड़ा के राजनीतिक इतिहास को देखते हुए यह आवश्यक है कि पार्टी में पूर्ण एकता हो और गुटों का अभाव हो। सत्तापक्ष को चाहिए को उपचुनाव से पहले ऐसी नकारात्मक गतिविधियों पर जल्द विराम लगाया जाए।

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