सहकारी सभा के सचिव, ऑडिटर समेत आठ को कठोर कारावास की सजा
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गलत ऋण माफी देने और ऑडिट में गड़बड़ी और रिकॉर्ड जलाने पर दर्ज भ्रष्टाचार के एक मामले में आठ लोगों को कठोर कारावास की सजा हुई है। हमीरपुर जिला सत्र न्यायाधीश पदम सिंह ठाकुर की अदालत ने ककड़यार कृषि सेवा सहकारी सभा सीमित के सचिव और ऑडिटर समेत आठ लोगों को इस मामले में दोषी पाया है।
अदालत ने विभिन्न धाराओं के तहत शनिवार को सचिव और सभा के सदस्यों को पांच-पांच साल और ऑडिटर को चार साल की कैद की सजा सुनाई है। जिला न्यायवादी चंद्रशेखर भाटिया ने बताया कि 5 नवंबर, 2009 को तत्कालीन सहायक रजिस्ट्रार सहायक पंजीयक सहकारी सभाएं हमीरपुर ने पुलिस थाना में ककड़यार कृषि सेवा सहकारी सभा सीमित के सचिव, ऑडिटर और सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करवाया था।
पुलिस में दर्ज केस में सहायक पंजीयक दिलेराम धीमान ने लोगों को दिए गए ऋण माफी में बरती गई वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। वित्तीय अनियमितताओं की जांच सहकारी सभाएं हमीरपुर के निरीक्षक जगदीश चंद जसवाल ने की थी। जांच में पाया गया था कि आरोपियों ने कुछ रिकॉर्ड भी जला दिए थे। विभाग की जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ऑडिटर ने गलत ऑडिट किया था।
इस मामले की पुलिस जांच इंस्पेक्टर शेर सिंह और इंस्पेक्टर अनंत राम ने की। मुकदमे की पैरवी जिला न्यायवादी चंद्रशेखर भाटिया और उप न्यायवादी अनुज शर्मा ने की। अदालत में कुल 28 गवाह पेश हुए। सहकारी सभा के सचिव सुनील कुमार के खिलाफ धारा 420, 467 और 468 के तहत पांच वर्ष की कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
जुर्माना न भरने पर छह माह का अतिरिक्त कैद और धारा 201, 120 बी में 3 साल कठोर कारवास व तीन हजार रुपये जुर्माना किया गया। ऑडिटर चुन्नी लाल को पीसी एक्ट के तहत चार साल की कठोर कैद की सजा और 10 हजार रुपये जुर्माना किया गया। जुर्माना अदा न करने पर एक साल की अतिरिक्त सजा और धारा 120 में तीन वर्ष की कैद
और 3 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई। सभा के छह सदस्यों रतन चंद डोगरा, संतोष कुमार, राज कुमार, बहादुर सिंह, मदन लाल और केहर सिंह को धारा 420 में पांच साल की कठोर कैद और 5 हजार रुपये जुर्माना और धारा 120 बी में तीन साल की जेल और तीन हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।