{"_id":"5f47e95ae2df8c554c119786","slug":"responsibility-for-making-digital-ration-cards-handed-over-to-panchayats-to-prevent-fraud","type":"story","status":"publish","title_hn":"फ्रॉड रोकने के लिए पंचायतों को सौंपी डिजिटल राशनकार्ड बनाने की जिम्मेदारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फ्रॉड रोकने के लिए पंचायतों को सौंपी डिजिटल राशनकार्ड बनाने की जिम्मेदारी
Fri, 28 Aug 2020 10:50 AM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Fri, 28 Aug 2020 10:50 AM IST
विज्ञापन
राशनकार्ड
- फोटो : अमर उजाला
बीपीएल और अंत्योदय के राशनकार्ड बनवाकर प्रदेश में तैनात 125 सरकारी अफसरों की ओर से गरीबों का राशनकार्ड डकारने का मामला सामने आने के बाद अब खाद्य आपूर्ति विभाग ने डिजिटल राशनकार्ड बनाने की जिम्मेदारी ग्रामीण विकास विभाग को सौंप दी है। यानी अब पंचायतें खुद डिजिटल राशनकार्ड बनाएंगी। इससे पहले भी हालांकि राशनकार्ड तो पंचायतें खुद बनातीं थीं, लेकिन उनकी डिजिटाइजेशन खाद्य आपूर्ति विभाग करता था।
विज्ञापन
फ्रॉड का मामला सामने आने के बाद अब विभाग का कहना है कि कौन गरीब है और कौन नहीं ये पंचायत सचिव, पंचायत प्रधानों और ग्रामीण विकास विभाग को पता है। इसलिए खाद्य आपूर्ति विभाग यह काम ग्रामीण विकास विभाग को सौंपेगा। दोनों विभागों में इसको लेकर बैठक भी हुई है।
विज्ञापन
आशंका यही है कि 125 असिस्टेंट प्रोफेसर, मेडिकल आफिसर और स्कूल प्रवक्ता ऐसे हैं, जिन्होंने बीपीएल और अंत्योदय राशनकार्ड बनाने का काम पंचायत प्रधानों और सचिवोें की ही मिलीभगत से किया है। मजे की बात तो यह भी है कि बीपीएल श्रेणी वालों को केंद्र से जारी 5 किलो प्रतिव्यक्ति मुफ्त चावल भी 104 अफसरों ने डकार लिए।
विज्ञापन
इसमें 20 डॉक्टर, 40 प्रवक्ता व अन्य अधिकारी शामिल हैं। यह राशन पिछले माह ही डिपुओं में आवंटित हुआ है। अब पंचायतों में कार्ड बनाए जाने से पूरी जिम्मेदारी ग्रामीण विकास विभाग की होगी। खाद्य आपूर्ति विभाग का कहना है कि वर्ष 2013 से पहले भी पंचायतों में ही राशनकार्ड बनते थे। पंचायतों में सभी लोगों का रिकॉर्ड रहता है। ऐसे में घपला होने की आशंका नहीं रहेगी।