तो क्या कैद होकर रह जाएगी सतलुज नदी..
हिमाचल की ऐतिहासिक नदी सतलुज अगले एक दशक में टनल में कैद हो जाएगी। इस नदी पर अब तक 9200 मेगावाट पावर प्रोजेक्ट तो बन चुके हैं या फिर प्रस्तावित हैं।
देहरादून स्थित भारतीय वानिकी एवं अनुसंधान शिक्षा परिषद ने नदी पर बन रहे पावर प्रोजेक्ट से होने वाले पर्यावरण क्षति का भी आंकलन किया जा चुका है।
उत्तराखंड की तर्ज पर किन्नौर सतलुज क्षेत्र ईको सेंसिटिव जोन बने
मांग की जा रही है कि उत्तराखंड की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में भी सतलुज नदी के आसपास क्षेत्र को ईको सेंसिटिव जोन घोषित किया जाए, जिससे नदी के अस्तित्व को बचाया जा सके।
किन्नौर जिला भूकंपीय जोन पांच में है। इसके पहाड़ों पर अंधाधुंध खनन करने से पर्यावरण और ईकोलॉजी पर असर पड़ रहा है।
पन बिजली विशेषज्ञ और ऊर्जा महकमे से रिटायर अभियंता आरएल जस्टा का कहना है कि प्रदेश सरकार को तत्काल प्रभाव से उत्तराखंड के गोमुख से उत्तरकाशी की तर्ज पर किन्नौर में सतलुज नदी को ईको सेंसिटिव जोन के दायरे में लाया जाए। प्रस्तावित जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण पर सरकार फिर से विचार करे।