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यहां 56 साल बाद सागर से बाहर निकलेंगे देवता, लोग कर सकेंगें दर्शन

Thu, 08 Dec 2016 02:49 PM IST
रितेश गुलेरिया/खेमराज शर्मा/अमर उजाला, बिलासपुर
रितेश गुलेरिया/खेमराज शर्मा/अमर उजाला, बिलासपुर Updated Thu, 08 Dec 2016 02:49 PM IST
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rehabilitation of the submerged temples in Govindsagar dam

देश की सबसे बड़ी महत्वाकांक्षी भाखड़ा बांध परियोजना से वर्ष 1960 से गोबिंदसागर झील में जलमग्न हुए एक दर्जन से ज्यादा ऐतिहासिक मंदिर जल्द बाहर निकलेंगे। बिलासपुर के दनोह स्थित श्री काला बाबा मंदिर के पास इन्हें शिफ्ट किया जाएगा। दिल्ली से आई पुरातत्व विभाग की टीम ने जमीन फाइनल कर दी है।

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प्रशासन ने औपचारिकताएं पूरी कर प्रस्ताव निदेशालय को भेज दिया है।भाखड़ा बांध से बनी गोबिंदसागर झील में बिलासपुर के सांडू मैदान में 7वीं, 9वीं और 18वीं शताब्दी में बने करीब 28 मंदिर जलमग्न हो गए थे। पिछले 56 सालों से इन्हें शिफ्ट करने की योजना फाइलों में ही दफन थी। कोठीपुरा और जबली में जमीन देखी गई लेकिन रिजेक्ट हो गई।
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लंबे संघर्ष और हस्ताक्षर अभियान के बाद अब एक दर्जन मंदिरों को दनोह शिफ्ट करने की उम्मीद जगी है। उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर ने बताया कि दनोह में जगह लगभग फाइनल है। नीति आयोग की टीम भी यहां निरीक्षण करना चाहती है। जल्द ही तिथि तय होने के बाद उन्हें बुलाया जाएगा। 

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रंगनाथ मंदिर में जल चढ़ाते ही होती थी बारिश

rehabilitation of the submerged temples in Govindsagar dam

रंगनाथ मंदिर, षड् मुखेश्वर, रघुनाथ मंदिर, खनेश्वर, सीता राम मंदिर, नरदेश्वर मंदिर, मुरली मनोहर मंदिर, हनुमान मंदिर, गोपाल मंदिर सहित करीब एक दर्जन से ज्यादा मंदिर शिफ्ट होंगे। ये मंदिर एक हजार साल पुरानी शिल्पकला के अद्भुत नमूने हैं। 

जलमग्न मंदिरों के दर्शन साल में एक बार गर्मियों के दौरान ही होते हैं जब झील का पानी उतरता है। 70 फीसदी मंदिर गाद में धंस चुके हैं। मान्यता है कि जलमग्न मंदिरों में करीब एक हजार वर्ष पुराने भगवान शिव के रंगनाथ मंदिर में डाली जलधारा अगर सतलुज नदी में मिलती है तो बारिश शुरू हो जाती है।

हाइड्रोलिक मशीनों की मदद से उठा जाएंगे मंदिर

rehabilitation of the submerged temples in Govindsagar dam
इस जगह स्‍थापित किए जाएंगे मंदिर।

गोबिंदसागर से मंदिरों को शिफ्ट करने का पूरा प्रोजेक्ट केंद्र सरकार के पुरातत्व विभाग की देख रेख में चल रहा है। जिला प्रशासन ने इसके लिए जमीन दे दी है। गोबिंदसागर झील से मंदिरों को हाइड्रोलिक मशीनों की मदद से उठा कर स्थानांतरित किया जाएगा। 

इस प्रोजेक्ट पर कितना खर्च आएगा इसका खाका नीति आयोग की टीम के बिलासपुर दौरे के बाद बनेगा। इस संबंध में नीति आयोग ने जिला प्रशासन के साथ पत्राचार भी किया है। टीम मंदिरों के निरीक्षण को जल्द ही बिलासपुर आएगी।

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