पूर्व एसडीएम को घूस के आरोप में हिरासत में लिया, एक लाख के साथ दो दलाल गिरफ्तार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पांवटा साहिब में एसडीएम रहे हमीरपुर तकनीकी विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार एचएस राणा एक लाख रुपये की घूस मांगने के आरोप में फंस गए हैं। आरोप है कि स्टोन क्रशर लगाने की अनुमति के लिए फाइल पर हस्ताक्षर करने के एवज में एचएएस अफसर ने दलाल के माध्यम से रुपये मांगे थे।
बुधवार को विजिलेंस ने पांवटा में एक लाख रुपये लेते एक दलाल समेत दो को गिरफ्तार कर लिया। चंडीगढ़ में फाइल पर साइन करने वाले पूर्व एसडीएम पांवटा एवं रजिस्ट्रार राणा को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
विजिलेंस के मंडी जोन के एसपी डॉ. डीके चौधरी ने इसकी पुष्टि की है। इस संबंध में मामला विजिलेंस के हमीरपुर थाने में दर्ज कर लिया गया है।जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता हरियाणा के जींद के संदीप दांडा ने पांवटा में स्ट्रोन क्रशर के लिए आवेदन किया था।
विजिलेंस ने ऐसे पकड़ा मामला
उस वक्त राणा पांवटा के एसडीएम थे। विभिन्न विभागों की कमेटी ने आवेदन फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए, लेकिन एसडीएम के साइन नहीं हो सके। इसी बीच राणा का तबादला हो गया।
इसके बाद साइन करने को आवेदक के संपर्क करने पर राणा ने उसे सुलभ अग्रवाल का नंबर देकर बात करने को कहा। अग्रवाल ने एक लाख रुपये की डिमांड रखी। इसके बाद संदीप ने विजिलेंस से एसडीएम की शिकायत कर दी।
विजिलेंस ने तीन टीमें गठित कर सोमवार का दिन पैसे देने को तय किया, लेकिन सुलभ ने खुद पैसे लेने के बजाय अपने परिचित रितेश बंसल को भेजा। ब्यूरो ने तय प्लान के हिसाब से बंसल को एक लाख रुपये के साथ रंगे हाथ पकड़ लिया।
इस बीच दूसरी टीम ने सुलभ और तीसरी टीम ने चंडीगढ़ में बैठे आरोपी एचएएस अधिकारी राणा को धर दबोचा। विजिलेंस के आईजी जेपी सिंह ने बताया कि दोनों दलाल गिरफ्तार कर लिए हैं, जबकि राणा से पूछताछ की जा रही है।
रिश्वत मामले से और दागदार हुई तकनीकी विवि की छवि
हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर के रजिस्ट्रार के दलाल के रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़े जाने से विवि की छवि को एक बार फिर दाग लगा है। एचएएस अधिकारी एचएस राणा वर्तमान में तकनीकी विवि में रजिस्ट्रार के पद पर सेवारत है। इससे पूर्व तकनीकी विवि में भर्तियों और भवन के मरम्मत पर खर्च राशि से संबंधित मामला भी विजलेंस में है।
यह विवि पूर्व भाजपा सरकार में वर्ष 2011 में शुरू हुआ है। गिरफ्तार अधिकारी पूर्व में जिला सिरमौर के पांवटा उपमंडल में एसडीएम के पद पर रहा है। उस दौरान स्टोन क्रशर की क्लीयरेंस के मामले की फाइल पर उनके हस्ताक्षर होने थे। लेकिन बाद में उनका पांवटा से तबादला हो गया।
इस पुराने कार्य की एवज में घूस लेते हुए बुधवार को विजिलेंस ने उसे धर दबोचा। वह मंगलवार को ही विश्वविद्यालय से एक दिन का अवकाश लेकर चंडीगढ़ गया था। संबंधित अधिकारी मूलत: जिला चंबा का रहने वाला है। लेकिन चंडीगढ़ और सोलन जिला में भी उसकी संपत्तियां बताई जा रही हैं। इसका खुलासा आने वाले समय में विजिलेंस जांच में हो सकता है।
उधर, तकनीकी विवि के कुलपति डॉ. एसपी बंसल ने कहा कि उन्हें सूचना मिली है, लेकिन जांच में ही सारे मामले का पटाक्षेप हो पाएगा। उन्होंने कहा कि रजिस्ट्रार को उनके पद से हटाने का अधिकार प्रदेश सरकार के पास है।