हिमाचल में सीएम तय करने में संघ की रहेगी अहम भूमिका
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मुख्यमंत्री के नाम पर नब्ज टटोलने पहुंचे केंद्रीय पर्यवेक्षकों के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रदेश कार्यालय जाने से साफ है कि अंतिम फैसला संघ की सहमति से होगा। भाजपा नेतृत्व ऐसे अहम फैसलों में भले संघ की राय लेता रहा है, लेकिन इस तरह पर्यवेक्षकों की बैठक अमूमन नहीं होती है।
प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी संघ की भूमिका इस बार बेहद अहम रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि प्रदेश के लिए दिल्ली से तय होने वाले मुख्यमंत्री के लिए संघ का समर्थन बेहद अहम है।
दौड़ में दिख रहे नड्डा, जयराम और धूमल या फिर किसी ओर को संघ का आशीर्वाद मिलता है, यह देखना सबसे अहम रहेगा। केंद्र से पर्यवेक्षक निर्मला सीतारमण और नरेंद्र तोमर के साथ प्रदेश प्रभारी मंगल पांडेय, प्रदेश महामंत्री संगठन प्रवीण राणा ने शुक्रवार सुबह नाभा स्थिति संघ प्रदेश कार्यालय में प्रांत प्रचारक संजीवन और सह प्रचारक संजय कुमार के साथ बैठक की।
पर्यवेक्षकों के जाने के बाद हुई बैठक
पार्टी सूत्रों के मुताबिक बैठक में पर्यवेक्षकों ने संघ के पदाधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री का नाम तय करने के लिए चल रही प्रक्रिया से अवगत करवाया। संघ के साथ विचाराधीन नामों पर भी चर्चा हुई है। संघ की ओर से भी कुछ सुझाव पर्यवेक्षकों को मिले हैं।
इससे साफ है कि अकसर राजनीतिक मामलों पर संघ की प्रत्यक्ष भागीदारी से बचने वाली भाजपा में अब स्थितियां बदली हैं। पार्टी के प्रचार के दौरान भी संघ के आंतरिक सर्वेक्षण और टिकट आवंटन में भूमिका भी बढ़ी है। शुक्रवार को पर्यवेक्षकों की बैठक से यह संकेत मिले हैं कि सरकार बनने के बाद संघ की उसके कामकाज पर पैनी नजर रहेगी।
केंद्र के पर्यवेक्षकों और प्रदेश प्रभारी के दिल्ली लौटने के बाद भी बैठकों का दौर नहीं थमा। पार्टी के प्रदेश कार्यालय में वरिष्ठ विधायकों की एक बैठक हुई है। इसमें नड्डा कैंप के विधायक मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री की रेस में चल रहे जयराम ठाकुर भी मौजूद रहे। सूत्रों की मानें तो धूमल कैंप के शक्ति प्रदर्शन से लेकर पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर मंथन हुआ। नड्डा कैंप हर सियासी गतिविधि का आकलन कर रहा है।